पट्टाचार्य विशुद्ध सागर जी ससंघ सागर की ओर विहाररत हैं। पट्टाचार्य विशुद्ध सागर जी के शिष्य विचित्र बाते प्रणेता मुनिश्री सर्वार्थ सागर जी इस दौरान प्रवचन कर रहे हैं। उनके प्रवचनों को सुनने के लिए समाजजन एकत्र हो रहे हैं। सागर से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटील की यह खबर…
सागर। पट्टाचार्य विशुद्ध सागर जी ससंघ सागर की ओर विहाररत हैं। पट्टाचार्य विशुद्ध सागर जी के शिष्य विचित्र बाते प्रणेता मुनिश्री सर्वार्थ सागर जी इस दौरान प्रवचन कर रहे हैं। उनके प्रवचनों को सुनने के लिए समाजजन एकत्र हो रहे हैं। उन्होंने मंगलवार को अपने प्रवचन में कहा कि किसी का अपमान करके कभी सम्मान नहीं पाया जा सकता।
हम सभी जीवन में सम्मान पाना चाहते हैं, लेकिन हमें यह समझना जरूरी है कि सम्मान कभी अपमान के रास्ते नहीं मिलता। जब हम दूसरों को नीचा दिखाते हैं, उनका मज़ाक उड़ाते हैं या उनकी गलतियों को सार्वजनिक करते हैं तो हम खुद को महान नहीं, बल्कि छोटा साबित करते हैं। सच्चा सम्मान तभी मिलता है, जब हम दूसरों को आदर देना जानते हैं, चाहे वे हमसे छोटे हों या बड़े, सफल हों या असफल। विनम्रता, सहानुभूति और संयम, ये वो गुण हैं जो किसी भी इंसान को ऊंचा बनाते हैं। याद रखिए, दूसरों का आदर करना, खुद को आदर देने के बराबर है।













Add Comment