दोहों का रहस्य समाचार

दोहों का रहस्य -134 जीवन के हर क्षण में परमात्मा की अनुभूति संभव है : समय का मूल्य समझना आवश्यक है


दोहे भारतीय साहित्य की एक महत्वपूर्ण विधा हैं, जो संक्षिप्त और सटीक रूप में गहरी बातें कहने के लिए प्रसिद्ध हैं। दोहे में केवल दो पंक्तियां होती हैं, लेकिन इन पंक्तियों में निहित अर्थ और संदेश अत्यंत गहरे होते हैं। एक दोहा छोटा सा होता है, लेकिन उसमें जीवन की बड़ी-बड़ी बातें समाहित होती हैं। यह संक्षिप्तता के साथ गहरे विचारों को व्यक्त करने का एक अद्भुत तरीका है। दोहों का रहस्य कॉलम की 134वीं कड़ी में पढ़ें मंजू अजमेरा का लेख…


“जा पल दरसन साधु का, ता पल की बलिहारी।

राम नाम रसना बसे, लीजै जन्म सुधारि॥”


कबीर दास जी का यह दोहा भक्ति की शक्ति, ईश्वर-दर्शन की महिमा और नाम-स्मरण की परम सार्थकता को गहराई से प्रकट करता है। वे स्पष्ट करते हैं कि जिस पल ईश्वर के दर्शन हों या हमारी वाणी से भगवान का नाम निकले, वह क्षण साधारण नहीं होता—वह जीवन को दिशा देने वाला, मोक्ष की ओर ले जाने वाला दिव्य क्षण बन जाता है।

 

कबीर कहते हैं कि ऐसे पवित्र क्षण पर जीवन न्योछावर किया जा सकता है। यह दोहा इस गूढ़ सत्य को उद्घाटित करता है कि आत्मा का परम लक्ष्य ईश्वर का साक्षात्कार और निरंतर नाम-स्मरण है। सांसारिक उपलब्धियाँ कितनी भी बड़ी क्यों न हों, वे उस एक क्षण के आगे तुच्छ हैं जिसमें हम ईश्वर से जुड़ जाते हैं।

 

यह संदेश हमें यह भी सिखाता है कि समय का मूल्य समझना आवश्यक है। जीवन के हर क्षण में परमात्मा की अनुभूति संभव है – यदि हम सजग रहें। एक क्षण की भक्ति, एक पल का नाम-स्मरण, हमारे पूरे जीवन को रूपांतरित कर सकता है।

 

कबीर इस दोहे के माध्यम से हमें उस चेतना की ओर ले जाते हैं, जिसमें नाम-जप, भक्ति, सद्भाव और क्षणिक जागृति ही जीवन की सच्ची पूँजी हैं। वे कहते हैं – यदि हम उस एक क्षण को पहचान लें जब ईश्वर हमारे भीतर प्रकट हो रहे हों, तो वही क्षण हमें अमरता की ओर ले जाता है।

 

इसलिए कबीर जी हमें प्रेरित करते हैं कि हम उस पावन पल को कभी न भूलें, बार-बार उसका स्मरण करें और ईश्वर के नाम को अपने जीवन का केंद्र बना लें।

आप को यह कंटेंट कैसा लगा अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।
+1
0
+1
0
+1
0
Shreephal Jain News

You cannot copy content of this page