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संसार में हमारा सबसे बड़ा शत्रु कषाय है: प्रभु रथ में हुए सवार भव्य शोभायात्रा निकली


भोपाल नारियलखेड़ा जिनालय में पट्टाचार्य विशुद्ध सागरजी महाराज सहित 32 मुनिराज के सानिध्य में पंच कल्याणक मोक्ष कल्याणक के साथ संपन्न हुआ। सुबह प्रभु के मोक्ष कल्याणक की क्रियाओं के साथ विश्व शांति के लिए आहुतियां दी गई। भोपाल से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटील की यह खबर…


भोपाल /नारियलखेड़ा। भोपाल नारियलखेड़ा जिनालय में पट्टाचार्य विशुद्ध सागरजी महाराज सहित 32 मुनिराज के सानिध्य में पंच कल्याणक मोक्ष कल्याणक के साथ संपन्न हुआ। सुबह प्रभु के मोक्ष कल्याणक की क्रियाओं के साथ विश्व शांति के लिए आहुतियां दी गई। मीडिया प्रभारी अंशुल जैन ने बताया कि गाजे बाजे के साथ प्रभु जिनेंद्र की शोभायात्रा निकली। इसमें प्रभु जिनेंद्र का रथ श्रद्धा भक्ति का केंद्र था। मार्ग में जगह-जगह आरती उतार कर प्रभु भक्ति की गई। प्रभु जिनेंद्र की भक्ति में सभी झूम रहे थे। प्रवचन में पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी ने कहा कि संसार में भाई परिवार नातेदार सभी अपने मित्र है। स्वयं का सबसे बड़ा शत्रु है तो कषाय है।

अगर कषाय को दूर कर दो तो स्वयं के सभी अपने अपने ही होंगे। आचार्य श्री विशुद्धसागर जी ने कहा कि धर्म संस्कृति संस्कारों की रक्षा होगी तो देश सुरक्षित रहेगा। अपने ज्ञान को मज़बूत बनाओ ज्ञान से ही विस्तार है। जीवन जीना महत्वपूर्ण नहीं विवाद रहित जीवन जीना महत्वपूर्ण हैं। भारत की संस्कृति कृषि प्रधान ही नहीं, ऋषि प्रधान भी है। विदेशों में वैचारिक विज्ञान मिलेगा, लेकिन वीतराग विज्ञान भारत देश की पावन धरा में है।

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