बड़े जैन मंदिर में संस्कार शिक्षण शिविरों के माध्यम से बच्चों को प्रभु भक्ति, पूजन अभिषेक आदि की शिक्षा दी जा रही है। आचार्य श्री 108 विद्यासागर महाराज के पावन आशीर्वाद एवं मुनि श्री 108 सुधासागर महाराज के आशीर्वाद एवं प्रेरणा से शिक्षण शिविर लगाए जा रहे हैं। यह शिविर 3 जून तक चलेंगे। मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर…
मुरैना। भौतिकतावादी युग में जहां ग्रीष्मकालीन अवकाश में बच्चे मटरगस्ती करते हुए मोबाइल आदि पर अपना समय व्यतीत करते हैं, वहीं बड़े जैन मंदिर में इन अवकाशों में संस्कार शिक्षण शिविरों के माध्यम से उन्हें प्रभु भक्ति, पूजन अभिषेक आदि की शिक्षा दी जा रही है। आचार्य श्री 108 विद्यासागर महाराज के पावन आशीर्वाद एवं मुनि श्री 108 सुधासागर महाराज के आशीर्वाद एवं प्रेरणा से शिक्षण शिविरों का आयोजन हो रहा है।
इसमें मुनिश्री विलोकसागर एवं विबोधसागर महाराज का सान्निध्य प्राप्त हो रहा। श्री दिगम्बर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान के तत्वावधान में 3 जून तक ग्रीष्मकालीन धार्मिक शिक्षण शिविर श्री 1008 पारसनाथ दिगम्बर जैन पंचायती मंदिर में किया जा रहा है, जिसमें 450 विद्यार्थियों की संख्या में धार्मिक शिक्षण शिविर का लाभ उठा रहे है। धार्मिक शिक्षण शिविर में श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर जयपुर से पधारे विद्वान भैया लोगों के द्वारा धार्मिक कक्षाएं चल रही है।
शिविर में प्रथम भाग बाल बोध अजय भैयाजी, छहढाला ग्रन्थ विद्वत् आशीष जैन शास्त्री मबई, भक्तामर ग्रंथ विद्वत् नीरज जैन शास्त्री भंगवा, द्रव्यसंग्रह विद्वत् सुरेश जैन शास्त्री, तत्त्वार्थसूत्र विद्वत् राजेंद्र जैन शास्त्री, बाल बोध भाग 2 विद्वत् संकल्प जैन शास्त्री इन सभी विषयों का अध्ययन करा रहे हैं इन शिविरों का आयोजन क्षेत्रीय शिविर प्रभारी विद्वत् नवनीत जैन शास्त्री मुरैना, पंडित आशीष जैन शास्त्री मबई का संयोजन में यह शिविर लगाया जा रहा है। स्थानीय शिविर प्रभारी वीरेंद्र जैन बाबा, मुख्य संयोजक राजकुमार जैन वरैया आदि सभी शिविर की व्यवस्थाओं में सहयोग प्रदान कर रहे हैं।
शिविरार्थी बच्चे सभी से बालते हैं जय जिनेंद्र
शिविर में नन्हें मुन्ने बच्चे अति उत्साह के साथ सम्मिलित हो रहे हैं। अब बच्चे नमस्ते या गुड मॉर्निंग नहीं बोलते, वे सभी एक दूसरे को जय जिनेंद्र बोलते हैं। यानी कि एक दूसरे को अभिवादन करते समय भी श्री जिनेंद्र भगवान का नाम लेते हैं। ष्जय जिनेंद्रष् यानिकि जिनेंद्र भगवान की जय हो । ष्जिनेंद्र कौनष् यानिकि जिन्होंने अपनी इंद्रियों पर विजय प्राप्त करली है, जिन्होंने अपनी इंद्रियों को वश में कर लिया हो, जिन्होंने अपने विकारों को जीत लिया हो, उनकी जय हो, जय हो, जय हो ।
जैन दर्शन के मूलभूत सिद्धांतों की दी गई शिक्षा
शिविर के दौरान बच्चों को जैन दर्शन के मूलभूत सिद्धांतों की शिक्षा दी जा रही है। सभी नौनिहालों को प्रतिदिन देवदर्शन के लिए प्रेरित किया जा रहा है, साथ ही उन्हें दिन में भोजन करने एवं पानी छानकर पीने को सिखाया जा रहा है। बाहर से आए हुए विद्वान उन्हें धार्मिक दृष्टि के साथ साथ वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी इनके लाभ और हानि से भी परिचित करा रहे हैं।
अ से आदिनाथ, म से महावीर
स्कूली शिक्षा में आ से आम और म से मछली पढ़ाया या दिखाया जाता है लेकिन, शिक्षण शिविर में आ से आदिनाथ और म से महावीर पढ़ाया और सिखाया जा रहा है। बच्चों को सिखाया जा रहा है कि मंदिर क्या होते हैं, हमें मंदिर क्यों जाना चाहिए, हमें मंदिर जाने से क्या फायदा होता है। बहुत ही सरल एवं सहज भाषा में इन सभी की शिक्षा दी जा रही है।
श्रेष्ठियों द्वारा की जा रही है स्वल्पाहार की व्यवस्था
शिविर में लगभग 450 शिविरार्थी भाग ले रहे है । प्रथम चरण में प्रातः 07 बजे से शिविर प्रारंभ होते हैं और 10.30 तक चलते हैं। द्वितीय चरण में शाम को 5 बजे से रात्रि 08 बजे तक शिविर चलते हैं। जिसमें दोनों समय शिवरार्थियों के लिए स्वल्पाहार एवं शीतल पेय की व्यवस्था समाज के बंधुओं की ओर से की जा रही है।













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