गुजरी में आचार्य शिरोमणि पटाचार्य विशुद्ध सागरजी के परम शिष्य मुनि सारस्वत सागर, मुनि जयवंत सागर, मुनि सिद्ध सागर तथा क्षुल्लक श्रुत सागर का आगमन हुआ। पढ़िए दीपक प्रधान की रिपोर्ट…
धामनोद। गुजरी में आचार्य शिरोमणि पटाचार्य विशुद्ध सागरजी के परम शिष्य मुनि सारस्वत सागर, मुनि जयवंत सागर, मुनि सिद्ध सागर तथा क्षुल्लक श्रुत सागर का आगमन हुआ। मुनियों ने 1008 श्री चंद्रप्रभु भगवान की प्रतिमा के दर्शन कर गहरी भक्ति और अभिभूत भाव प्रकट किया। पाद प्रक्षालन अर्पित कासलीवाल द्वारा किया गया और आहार चर्या भी उनके निवास पर संपन्न हुई। प्रवचन में मुनि सारस्वत सागर ने कहा कि गुजरी जैसे स्थान पर मंदिर का होना अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह न केवल पूर्वजों की धर्मनिष्ठा को दर्शाता है, बल्कि मानपुर और धामनोद के बीच संतों के आवागमन एवं देवदर्शन की दृष्टि से भी यह स्थान विशेष महत्व रखता है। उन्होंने यहाँ की भक्ति भावना और संतों के प्रति लोगों के वात्सल्य की सराहना की। धामनोद जैन समाज के अध्यक्ष महेश जैन, सचिव दीपक प्रधान, सहसचिव अजय जैन, पूर्व अध्यक्ष राकेश जैन तथा मुनि सेवा समिति के संजय जैन, शैलेंद्र जैन, प्रशांत जैन, दीपांशु जैन और सचिन जैन ने मुनिश्री के चरणों में श्रीफल अर्पित करते हुए उन्हें धामनोद आने का निमंत्रण दिया।
जैन समाज अध्यक्ष महेश जैन और सचिव दीपक प्रधान ने जानकारी दी कि मुनि श्री का मंगल प्रवेश 12 मई, सोमवार सुबह 7 बजे गुलझरा में होगा। नगर के विभिन्न चौराहों से होते हुए जुलूस के साथ मंदिर पहुंचने पर प्रातः 9 बजे मंगल प्रवचन एवं आहार चर्या आयोजित की जाएगी।













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