जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थंकर भगवान महावीर ने वैशाख शुक्ल दशमी को केवल्य ज्ञान प्राप्त किया था। भगवान महावीर के ज्ञान कल्याण के अवसर पर देश भर के दिगंबर जैन मंदिरों में सकल जैन समाज पूर्ण श्रद्धा और भक्ति से भगवान महावीर की आराधना करेंगे। इस बार तिथि के अनुसार यह 7 मई बुधवार के दिन आ रहा है। इस दिन सभी जिनालयों में भगवान के अभिषेक, शांतिधारा समेत कई धार्मिक कार्यक्रम किए जाएंगे। श्रीफल जैन न्यूज की विशेष श्रृंखला में आज पढ़िए, उपसंपादक प्रीतम लखवाल द्वारा संकलित यह खास प्रस्तुति…
इंदौर। जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थंकर भगवान महावीर के ज्ञान कल्याणक के उपलक्ष्य में सकल जैन समाज में अपार धार्मिक उल्लास है। भगवान महावीर का ज्ञान कल्याणक इस बार 7 मई बुधवार को आ रहा है। भगवान महावीर ने वैशाख शुक्ल दशमी के दिन सर्वज्ञता हासिल की थी। यह दिन जैन समाज के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इस दिन इंदौर सहित देशभर के दिगंबर जैन मंदिरों में भगवान महावीर का ज्ञान कल्याणक पारंपरिक धार्मिक उत्साह के साथ मनाया जाएगा। प्राप्त जानकारी और ज्ञात स्रोतों के आधार पर भगवान महावीर का ज्ञान कल्याणक, जो केवल ज्ञान कल्याणक भी कहलाता है। एक महत्वपूर्ण जैन धार्मिक घटना है। यह वह दिन है, जब भगवान महावीर को 12 साल की कठोर तपस्या और ध्यान के बाद केवल ज्ञान (सर्वज्ञता) की प्राप्ति हुई थी। यह घटना जैन धर्म में एक महत्वपूर्ण और शुभ अवसर है। भगवान महावीर को केवल ज्ञान की प्राप्ति ऋजुबालिका नदी के तट पर जृम्भिक ग्राम के पास शाल वृक्ष के नीचे हुई थी। केवलज्ञान का अर्थ है सर्वज्ञता या अनंत ज्ञान। यह ज्ञान मोक्ष या निर्वाण की अवस्था है, जहां जीव को अज्ञान, भ्रम और दुःख से मुक्ति मिल जाती है।
ज्ञान कल्याणक इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि, यह भगवान महावीर के जीवन में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। यह दर्शाता है कि कैसे कठोर तपस्या और ध्यान के माध्यम से कोई भी व्यक्ति केवल ज्ञान प्राप्त कर सकता है और मोक्ष प्राप्त कर सकता है। ज्ञान कल्याणक जैन धर्म में एक महत्वपूर्ण उत्सव है। इस दिन जैन समुदाय के लोग मंदिरों में जाते हैं, भगवान महावीर की पूजा करते हैं और तपस्या और ध्यान करते हैं।













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