मुनिसुव्रतनाथ भगवान का जन्म और तप कल्याणक महोत्सव आर्यिका माताजी ससंघ के सानिध्य में मनाया गया। रिद्धि-सिद्धि मंत्रों से 1008 रजत कलशों से महामस्तकाभिषेक एवं पालना झुलाने का कार्यक्रम शिवम वाटिका में हुआ। इस अवसर पर आर्यिका स्वस्ति भूषण माताजी ने धर्मसभा को संबोधित किया। केकड़ी से पढ़िए अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर…
केकड़ी। जाने अनजाने में भूलवश मानव गलती कर बैठता है, और कर्म रूपी बंधन से जकड़ जाता है। घर के कचरे के लिए प्रतिदिन सफाई की आवश्यकता है उसी प्रकार कर्मों की सफाई के लिए प्रभु भक्ति करना भी आवश्यक होता है। बोहरा कॉलोनी स्थित श्री नेमिनाथ जैन मंदिर के निकट शिवम वाटिका में आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी ने धर्माेपदेश में कहे। उन्होंने कहा कि कर्मों की निर्जरा व आत्म विशुद्धि के लिए आलोचना, ,प्रतिक्रमण, प्रायश्चित एवं पश्चाताप सफल साधन है। किसी भी गलत कार्य के प्रति प्रायश्चित कर लेना एक बहुत बड़ा तप है। स्वयं के सुख के लिए कभी भी पर को कष्ट पहुंचाने की चेष्टा नहीं करनी चाहिए।
1008 रजत कलशों से महामस्तकाभिषेक
प्रातःकालीन शांतिधारा का सौभाग्य भागचंद ज्ञानचंद सुनीलकुमार जैन ज्वेलर्स परिवार को मिला। भगवान महावीर व आचार्य श्री के चित्र अनावरण व दीप प्रज्वलन तथा आर्यिका माताजी के पाद प्रक्षालन का पुण्यार्जन ओमप्रकाश गोविंदकुमार योगेशकुमार सदारा परिवार ने प्राप्त किया। आर्यिका माता जी को शास्त्र भेंट शुभकामना परिवार के पार्श्वनाथ ग्रुप द्वारा किया गया। समाज के अध्यक्ष ज्ञानचंद जैन ज्वैलर्स व मंत्री कैलाशचंद जैन मावा वालों ने बताया कि भगवान मुनिसुव्रतनाथ विधान आर्यिका माताजी ससंघ के सानिध्य में आयोजित किया गया। मीडिया प्रभारी रमेश बंसल व पारस जैन ने बताया कि बुधवार को मुनिसुव्रतनाथ भगवान का जन्म और तप कल्याणक महोत्सव आर्यिका माताजी ससंघ के सानिध्य में रिद्धि-सिद्धि मंत्रों से 1008 रजत कलशों द्वारा महामस्तकाभिषेक एवं पालना झुलाने का कार्यक्रम शिवम वाटिका में हुआ।













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