निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज इन दिनों बहोरीबंद अतिशय क्षेत्र में विराजमान होकर धर्म प्रभावना कर रहे हैं। उनके उपदेश सुनने के लिए आसपास के क्षेत्र से बड़ी संख्या में श्रद्धालु श्रावक यहां पहुंच रहे हैं। शनिवार को उन्होंने प्रवचन में कई महत्वपूर्ण उपदेश दिए।
कटनी। बहोरीबंद अतिशय क्षेत्र में अपने प्रवचन में मुनिश्री सुधासागर जी महाराज ने कहा कि जीव के अंदर एक चाहत होती है कि सारी दुनिया मेरे लिए हो और जो कुछ भी करता है सब अपने लिए करता है, इसका परिणाम ये निकलता है कि वह कभी भी अपनी इच्छाओं को पूरा नहीं कर पाता, अभी वह सारी दुनिया को अपना नहीं बना पाता और एक दिन ऐसा आता है कि जब अपने भी पराए हो जाते है, यहाँ तक भी अपनी किस्मत, अपना शरीर, ज्ञान, ध्यान और भगवान भी साथ नहीं देते। सारी दुनिया में दवाई कर ली, कोई इलाज ही नहीं लग रहा है, ये ऐसे यक्ष प्रश्न है जिनके समाधान तो है नहीं लेकिन खोजना पड़ेगा। समस्या है तो समाधान भी कंही न कंही है, बीमारी है अर्थात उसका निदान भी है, ये निश्चित समझना। जैसे डाकू है तो इसका अर्थ है दुनिया में साधु भी है, जहाँ पाप है तो पुण्य जरूर दुनिया में है, विपदा आई है तो उसे दूर करने का उपाय जरूर है।
दःख आया है तो घबराओ मत सुख का नंबर आने ही वाला है
ऐसे ही हम अपनी जिंदगी में समझे बुरे दिन आ रहे है तो इसका अर्थ है अच्छा दिन जरूर आएगा ही आएगा। हम अपने अनुभव को अनुमान बनाये और उसका निर्णय करें जो हमारे अनुभव में नहीं आ रहा है, ऐसा ज्ञान जब हमारे अंदर हो जाता है तो हमारी घबराटे खत्म हो जाती है। दुख आया है तो घबराओ मत सुख का नंबर आने ही वाला है। दुख आया है तो ज्यादा अहंकार मत करो, दुख आने में ज्यादा देरी नहीं लगना। जब भी अच्छी कार्य करने की बात आती है तुम तुरंत हा नहीं कहते, आपके मुँह से न निकलता है, यही शब्द बता रहा है कि अभी हमारा कल्याण बहुत दूर है, हम आसन्न भव्य नहीं है। मेरे जीवन में अच्छे दिन कब आएंगे, मैं भगवान कब बनूँगा आदि किसी अच्छी चीज से यदि प्रभावित हो रहे हो कि यह मेरे जीवन में कब आएगा, पहला यदि कोई अच्छी बात कहे तो बिना विचारे आपके मुंह से हां निकालना चाहिए। जितनी अपन भगवान की प्रशंसा करते हैं कि भगवन आप धन्य है, यदि उसका दसवां हिस्सा भी भाव कर ले कि जितनी अपन भगवान की पूजा कर रहे है, उतना स्वयं भगवान बनने का प्रयास कर ले भगवान के स्थान पर तू खुद भगवान बन जाएगा।
तुम गुरु को डाकू समझ रहे हो?
तुम्हें डर लग रहा है कि गुरु के सामने जाऊंगा तो गुरु गुटखा छुड़ा देंगे, मुझे मंदिर जाने का नियम लेना पड़ेगा। इसलिए मैं तो महाराज के पास जाता ही नहीं तो इसका अर्थ है कि तुम गुरु को डाकू समझ रहे हो, क्योंकि डरा तो डाकू से जाता है। कितने ही बड़े पापी हो तुम, कितना ही बड़ा तुम्हे डर लग रहा हो, उस पाप को मत करना जिसको करते हुए तुम्हे मम्मी पापा का डर लगे। यदि तुम्हारे काले कारनामों के कारण मां-बाप की नजर झुक गयी, उनकी आंख में आंसू आ गया, कहां का मैंने ऐसा बेटा पैदा किया, इसने पूर्वजों की सारी इज्जत धूल में मिला दी, एक बार भी यह परिणाम आ गया तो जाओ इससे बड़ा अभिशाप तुम्हारी जिंदगी में नहीं होगा, तुम सैकड़ो भवों तक गंदे मां-बाप के यहां पैदा होंगे, पहली बात तो मां बाप मिलेंगे ही नहीं, अनाथ पैदा होंगे। गर्भ में आओगे ही नहीं, समुर्छनो में पैदा होंगे।
अभिषेक करके गंधोदक लगाओ
कुछ ऐसे कृत्य हैं जहां णमोकार मंत्र की शक्ति भी फेल हो जाती है, जब तुमने ऐसा कृत्य किया और तुम्हारे उपकारी के मन में खेद हो गया, पाप तुमने किया और आंसू मां-बाप के आ गए, नजर उनकी झुक गई, कुल कलंकित हो गया। यदि तुम्हारे कारण से राष्ट्र कलंकित हुआ है तो तुम म्लेच्छ खंड में जन्म लोगे क्योंकि पाप तुमने किया है देश कलंकित हुआ है। आतंकवादी का पाप इसलिए बड़ा है कि आतकंवादी के कारण देश बदनाम होता है कि ये आतंकवादी पैदा करता है। आप जैन है ऐसे पाप मत करना जिससे लोग कहने लगे कि जैनी लोग भी ऐसा पाप करने लगे, करोगे तुम और बदनाम होगी जैन जाति। कोई ऐसा पाप मत करना जिससे तुम्हारा भगवान का अभिषेक करना छूट जाए, गुरुओ को आहारदान देना छूट जाए। आप लिस्ट बनाओ जो पाप तुमने अभिषेक के कारण छोड़ दिए कि मैं भगवान को छूने लायक नहीं रहूंगा, छोड़कर दिखाओ, फिर अभिषेक करके गंधोदक लगाओ तो जाओ कौन सी बीमारी है जो दूर नहीं होगी।













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