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48 काव्यों की रचना पर 48 अर्घ्य समर्पित : भक्तामर विधान रचाया, श्रीफ़ल पत्रिका का विमोचन


अंतर्मुखी मुनिश्री पूज्य सागर जी महाराज के सानिध्य में भगवान आदिनाथ जन्म कल्याणक महोत्सव के पावन अवसर पर श्रीआदिनाथ मंदिर में आर्यिका पूर्णमति माताजी द्वारा रचित भक्तामर विधान रचाया गया। श्रीजी का अभिषेक, शांतिधारा एवं नित्यनियम का पूजन किया गया। इंदौर से निकलने वाली श्रीफल पत्रिका का विमोचन किया गया। सनावद से पढ़िए सन्मति जैन काका की यह खबर…


सनावद। त्याग एवं संयम के लिए जाने वाले नगर में विराजमान अंतर्मुखी मुनिश्री पूज्य सागर जी महाराज के सानिध्य में भगवान आदिनाथ जन्म कल्याणक महोत्सव के पावन अवसर पर श्रीआदिनाथ मंदिर में आर्यिका पूर्णमति माताजी द्वारा रचित भक्तामर विधान रचाया गया। सन्मति जैन काका ने बताया कि भगवान आदिनाथ के जन्म कल्याणक के अवसर पर मुनिश्री पूज्य सागर जी के सानिध्य में भगवान आदिनाथ का जन्म कल्याणक महोत्सव धूमधाम से मनाया गया।

इसमें प्रातः श्रीजी का अभिषेक, शांतिधारा एवं नित्यनियम का पूजन किया गया। इसके बाद मुनिश्री के सानिध्य में भक्तामर विधान रचना की गई। जिसमें तकरीबन 70 जोड़ों ने विधान का पूजन कर 48 अर्घ्य समर्पित किए। जिसमें मुख्य पात्रों का चयन किया गया। जिसमें सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य समर्पण सुरभि जैन को प्राप्त हुआ। वहीं ईशान इंद्र सुनील नीतू जैन, सनत इंद्र श्रीकांत प्रीति जैन एवं महेंद्र इंद्र नीरज निधि जैन, यज्ञ नायक राजा सपना जैन एवं कुबेर इंद्र बनने का सौभाग्य आशीष निधि झांझरी परिवार को प्राप्त हुआ।

पर हर काव्य का अपना एक मंत्र है

इस अवसर पर मुनि पूज्य सागर जी महाराज ने अपनी अमृत वाणी से भक्तामर विधान का सार बताते हुए कहा कि हम यहां भक्तामर की आराधना कर रहे है। इसमें हर काव्य में स्रोत तो हैं पर हर काव्य का अपना एक मंत्र हैं। हर काव्य का एक अपना रिद्धि मंत्र है। हर काव्य का यंत्र है, जो अलग अलग फलदायी होता है। 48 काव्यों से अलग-अलग कहानियां जुड़ी हैं। जिससे व्यक्ति की उनकी बीमारी उनके रोग उनके संकट दूर हुए हैं। जब भक्तामर की उत्पति हुई जब आचार्य मानतुंगाचार्य के भावों, परिणाम, उनके विचार,बुद्धि कितनी निर्मल हुई। यदि आपने आज इस विधान की शांति से सहजता से मन से वचन से इस विधान की आराधना की है तो समझ लेना आपका भव पार हो जाएगा।

 संकट है तो भक्तामर स्तोत्र चमत्कार दे सकता है

देश, समाज और परिवार पर कोई संकट आता है तो ऐसी स्थिति में शांत स्वभाव से भक्तामर विधान ही एकमात्र उपाय होता है। श्रद्धा-भाव से किया गया भक्तामर स्तोत्र सुख और शांति प्रदान करता है। जीवन की जटिलताओं को सहज बनाता है। पापों से मुक्त कराकर पुण्य मार्ग की ओर अग्रसर करता है। यदि किसी के जीवन में कोई संकट है तो भक्तामर स्तोत्र चमत्कार दे सकता है। इस अवसर पर रविवार को मुनि श्री की आहार चर्या का सौभाग्य अविनाश कुमार जैन शोभा जीजी परिवार को प्राप्त हुआ। इस अवसर पर कमल जैन पार्टी के सुमधुर भजनों से सभी समाजजन भक्ति एवं नृत्य करने पर लालायित कर दिया।

पत्रिका का हुआ विमोचन 

भगवान आदिनाथ जन्म कल्याणक महोत्सव के अवसर पर मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज की प्रेरणा एवं आशीर्वाद से इंदौर से निकलने वाली श्रीफल पत्रिका का विमोचन समाज के मनोज जैन, संतोष बाकलीवाल, विजय काला, पवन गोधा, आशीष झांझरी, प्रशांत जैन, वैभव जैन, सुधीर जैन, सुनील जैन, मुकेश जैन, राजा जैन ने किया। इसी कड़ी में रात्रि में मुनिश्री के सानिध्य में आनंद की यात्रा गुरु भक्ति एवं कमल जैन पार्टी द्वारा सुमधुर भजनों की प्रस्तुति दी गई। इस अवसर पर सभी समाजजन उपस्थित थे।

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Shreephal Jain News

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