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किया गया श्रीजी का भव्य पंचामृत अभिषेक, सामूहिक पूजन : आर्यिका अनंत मति माताजी का 24वां आर्यिका दीक्षा दिवस मनाया गया


 नगर में विराजमान आर्यिका सरस्वती माताजी की संगस्ता आर्यिका अनंत मति माताजी का 24वां आर्यिका दीक्षा दिवस सभी समाजजनों ने बड़े भक्तिभाव से मनाया। सन्मति जैन काका ने बताया कि इस पावन अवसर पर प्रातः श्री पार्श्वनाथ बड़ा मंदिर में श्रीजी का भव्य पंचामृत अभिषेक, सामूहिक पूजन और 1008 सहस्त्र नाम के जाप के साथ 1008 अष्ट द्रव्यों से अर्घ्य सभी समाजजनों द्वारा समर्पित किया गया। पढ़िए सन्मति जैन काका की रिपोर्ट…


सनावद। नगर में विराजमान आर्यिका सरस्वती माताजी की संगस्ता आर्यिका अनंत मति माताजी का 24वां आर्यिका दीक्षा दिवस सभी समाजजनों ने बड़े भक्तिभाव से मनाया। सन्मति जैन काका ने बताया कि इस पावन अवसर पर प्रातः श्री पार्श्वनाथ बड़ा मंदिर में श्रीजी का भव्य पंचामृत अभिषेक, सामूहिक पूजन और 1008 सहस्त्र नाम के जाप के साथ 1008 अष्ट द्रव्यों से अर्घ्य सभी समाजजनों द्वारा समर्पित किया गया। इसके बाद आचार्य श्री देशभूषण सागर जी के विधान में आर्यिका माताजी के सानिध्य में 36 अर्घ्य समर्पित किए गए।

आर्यिका अनंत मति माताजी का 24वां दीक्षा दिवस मनाते हुए, उनके अष्ट द्रव्यों से सामूहिक पूजन किया गया और बाद में उनका पंचामृत से पाद प्रक्षालन किया गया। सभी समाजजनों ने आर्यिका माताजी को शास्त्र भेंट किए। इस अवसर पर आर्यिका माताजी ने कहा कि जो उपकार हमारे गुरुदेव श्रमण रत्न आचार्य सुबल सागर जी महाराज ने हमारे ऊपर किया है, उसे हम कभी नहीं भूल पाएंगे। हमारे गुरुदेव सरल, सहज और ज्ञान की खान थे। उनकी दीक्षा लेकर हमने अपना जीवन सार्थक कर लिया। उन्हें आर्यिका दीक्षा 11 अक्टूबर 2001 को आचार्य शांति सागर स्मारक भोज ग्राम में प्रदान की गई थी। रात्रि में आर्यिका संघ की 24 दीपों से आरती की गई। इस अवसर पर संगीता पाटोदी, संगीता बाकलीवाल, राहुल स्वास्तिक, प्रशांत जैन और वारिश जैन ने आर्यिका माताजी के प्रति अपने भाव प्रकट किए। कार्यक्रम का संचालन अचिंत्य जैन ने किया। सभी समाजजन इस अवसर पर उपस्थित थे।

ध्वज वंदन समारोह का आयोजन

आर्यिका संघ के सानिध्य में ध्वज वंदन किया जाएगा। गणिनी आर्यिका 105 सरस्वती माताजी ससंघ के सानिध्य में 14 अक्टूबर, सोमवार को प्रातः 8:45 बजे बड़े मंदिर में चारित्र चक्रवर्ती आचार्य 108 श्री शांति सागर जी महाराज के आचार्य पद प्रतिष्ठापन शताब्दी वर्ष के अंतर्गत ध्वज वंदन का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर सभी साधर्मीजन उपस्थित होकर कार्यक्रम को सफल बनाएंगे।

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