समाचार

धर्मसभा में दिए प्रवचन : धर्म वीतराग विज्ञान है- आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी गुरुदेव


दिगम्बर जैनाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी गुरुदेव ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि हम सभी अंतिम तिर्थेश वर्धमान स्वामी के शासन में विराजते हैं। तीर्थंकर भगवान की पीयूष देशना जिनेंद्रवाणी जगतकल्याणी है। यह सर्वज्ञशासन, नमोस्तुशासन जयवन्त हो। जयवन्त हो वितरागी श्रमणसंस्कृति।आचार्यश्री ने आगे कहा कि ज्ञानियों को किसी से भी तुरंत प्रभावित नहीं होना चाहिए। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…


नांदणी मठ। दिगम्बर जैनाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी गुरुदेव ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि हम सभी अंतिम तिर्थेश वर्धमान स्वामी के शासन में विराजते हैं। तीर्थंकर भगवान की पीयूष देशना जिनेंद्रवाणी जगतकल्याणी है। यह सर्वज्ञशासन, नमोस्तुशासन जयवन्त हो। जयवन्त हो वितरागी श्रमणसंस्कृति।आचार्यश्री ने आगे कहा कि ज्ञानियों को किसी से भी तुरंत प्रभावित नहीं होना चाहिए।

उन्होंने एक उदाहरण देते हुए बताया कि जब हम अपने पिताजी के लिए खाना लेकर जाते हैं, और बारिश में टिफिन पर पानी की बूंदें गिरती हैं, तब भी भीतर रखी खीर या पूरी पर असर नहीं होता। इसी प्रकार, हमें अपने भीतर का ढक्कन बंद रखकर धर्म कमाने के लिए आगे बढ़ना चाहिए, चाहे हम कहीं भी जाएं। आचार्य श्री ने स्पष्ट किया कि विज्ञान धर्म हो या न हो, लेकिन धर्म वास्तव में वीतराग विज्ञान है। इस वीतराग विज्ञान को जिसने समझ लिया, उसने विश्व को समझ लिया। सुखमय जीवन जीने के लिए यदि आपने अज्ञान का आश्रय लिया है, तो संक्लेषता का अनुभव होगा।

लेकिन यदि आप विज्ञान का आश्रय लेते हैं, तो क्लेष से भरे रहेंगे। धर्म का आश्रय लेने पर आप परम सुखी हो जाएंगे। उन्होंने यह भी बताया कि लोग निरोगी रहने की इच्छा रखते हैं और विज्ञान गर्म पानी पीने की सलाह देता है, लेकिन धर्म जीवों की रक्षा की बात करता है। जब आप जीवों की रक्षा करते हैं, तो आप अपने लिए भी सुरक्षा करते हैं। आचार्य श्री ने एक कहानी साझा की जिसमें एक मां ने बच्चों को भोजन देने से पहले स्वयं न खाने का निर्णय लिया।

उस मां ने धर्म के प्रति अपनी निष्ठा को प्राथमिकता दी, भले ही अधिकारियों ने उसे अलग ढंग से भोजन करने का प्रस्ताव रखा। इस प्रकार, आचार्य श्री ने स्पष्ट किया कि धर्म का पालन करना हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है, और हमें अपने जीवन में इसे प्राथमिकता देनी चाहिए।

साभार: राजेश जैन दद्दू

शब्दांकन: श्री अभिषेक अशोक पाटील

(कार्याध्यक्ष – अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद, कोल्हापुर)

आप को यह कंटेंट कैसा लगा अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।
+1
2
+1
0
+1
0
Shreephal Jain News

About the author

Shreephal Jain News

Add Comment

Click here to post a comment

You cannot copy content of this page