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मुनि प्रमुदित सागर जी के ससंघ चार्तुमास में केश लोचन कार्यक्रम : केश लोचन से आत्म शुद्धि एवं कर्मों की निर्जरा


आचार्य पुलक सागर जी महाराज के श्री भट्टारक यशकीर्ति दिगंबर जैन गुरुकुल में मुनि प्रमुदित सागर जी के ससंघ चार्तुमास में केश लोचन कार्यक्रम हर्षोल्लासपूर्वक संपन्न हुआ। संत के हाथ से किसी जीव की हत्या न हो, इसलिए केश लोचन आवश्यक होता है। अगर कैंची या उस्तरे से केश काटा जाए, तो जीव हिंसा होने की संभावना होती है। पढ़िए सचिन गंगावत रिपोर्ट…


ऋषभदेव। भारत गौरव राष्ट्र संत आचार्य पुलक सागर जी महाराज के श्री भट्टारक यशकीर्ति दिगंबर जैन गुरुकुल में मुनि प्रमुदित सागर जी के ससंघ चार्तुमास में केश लोचन कार्यक्रम हर्षोल्लासपूर्वक संपन्न हुआ। ऋषभदेव जैन समाज के अध्यक्ष भूपेंद्र कुमार जैन ने बताया कि भगवान ऋषभदेव से लेकर आज तक हजारों वर्षों से केश लोचन की परंपरा चली आ रही है। जैन मूलाचार के अनुसार, दिगंबर साधुओं के 28 मूल गुणों में केश लोचन एक मूल गुण है, जिससे आत्मा की शुद्धि होती है और कर्मों की निर्जरा होती है।

प्रत्येक दिगंबर जैन साधु को चार महीने में एक बार केश लोचन करना आवश्यक है। यह तप, त्याग और संयम का प्रतीक है, जिससे मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। पूर्व महामंत्री प्रकाश भानावत ने बताया कि केश लोचन जैन धर्म की एक महत्वपूर्ण प्रथा है। दीक्षा के समय साधु या साध्वी अपना केश लोच करते हैं और हर चार महीने में अपने सिर एवं दाढ़ी के बालों को अपने हाथों से निकालते हैं। इस प्रथा के माध्यम से जैन साधु दुनिया के सभी सुखों का परित्याग करते हैं।

जैन मुनि केश लोच के समय किसी प्रकार के यंत्र का सहारा न लेते हुए अपने सिर एवं दाढ़ी के बालों को अपने हाथों से खींचकर निकालते हैं। जिस दिन मुनि महाराज अपना केश लोच करते हैं, उस दिन वह उपवास रखकर आत्म साधना करते हैं। जैन संतों का मानना है कि चार महीने से अधिक समय तक बाल बड़े होने पर जीव पड़ने की संभावना रहती है। संत के हाथ से किसी जीव की हत्या न हो, इसलिए केश लोचन आवश्यक होता है। अगर कैंची या उस्तरे से केश काटा जाए, तो जीव हिंसा होने की संभावना होती है।

ये भी रहे मौजूद

इस अवसर पर गुरुकुल ट्रस्ट के ट्रस्टी सुंदरलाल भानावत, समाज के महामंत्री प्रदीप कुमार जैन, पुलक मंच के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष सुरेश कोठारी, राष्ट्रीय सांस्कृतिक मंत्री बलवंत बल्लू, जिनशरणम ट्रस्ट के ट्रस्टी सुमेश वानावत, गुरुभक्त रमेश पंचोली, मुकेश भानावत, हेमंत अकोत, पुलक मंच के अध्यक्ष राकेश वानावत, महामंत्री भानु गनोडिया और अन्य समाजजन उपस्थित थे।

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