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अंतिम समय में आचार्य वसुनंदी जी के सान्निध्य में संल्लेखना की ओर अग्रसर : मृत्यु को महोत्सव के रूप में मनाने का नाम है संल्लेखना समाधि


सुहाग नगरी फिरोजाबाद में अभिक्षण ज्ञानोपयोगी आचार्य श्री 108 वसुनंदी जी महाराज के आशीर्वाद से गोहद निवासी स्वर्गीय श्री स्वरूप चंद्र जी की पुत्रवधू श्रीमती बीनु जैन धर्म पत्नी महेश चंद्र जैन बंटी हाल निवासी गौतम नगर दिल्ली का स्वास्थ्य कुछ समय से खराब चल रहा था । कुछ समय पूर्व जब डॉक्टरों ने बताया कि इनका अंतिम समय चल रहा है । तो बीनु जैन ने अपने इस नश्वर शरीर को छोड़ने से पहले संल्लेखना धारण करने की इच्छा व्यक्त की। पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट…


फिरोजाबाद। जैन दर्शन में अष्ट कर्मों का उल्लेख है, जिनमें से एक आयु कर्म भी है । आयु कर्म के पूर्ण होने को ही हम मरण कहते हैं । आत्मा तो अजर अमर है किन्तु आयु कर्म पूर्ण होने पर शरीर बदल जाता है। यदि आत्मा सरल परिणाम के साथ राग द्वेष को तज कर शांत परिणाम से इस नश्वर शरीर से गमन करती है तो उसे ही सल्लेखना समाधि कहते हैं। मुरैना निवासी अनूप भंडारी ने बताया कि वर्तमान में सुहाग नगरी फिरोजाबाद में अभिक्षण ज्ञानोपयोगी आचार्य श्री 108 वसुनंदी जी महाराज के आशीर्वाद से गोहद निवासी स्वर्गीय श्री स्वरूप चंद्र जी की पुत्रवधू श्रीमती बीनु जैन धर्म पत्नी महेश चंद्र जैन बंटी हाल निवासी गौतम नगर दिल्ली का स्वास्थ्य कुछ समय से खराब चल रहा था ।

कुछ समय पूर्व जब डॉक्टरों ने बताया कि इनका अंतिम समय चल रहा है । अब हमारे पास इनको बचा पाना संभव नही है और उन्हें घर ले जाने को कहा तो बीनु जैन ने अपने इस नश्वर शरीर को छोड़ने से पहले संल्लेखना धारण करने की इच्छा व्यक्त की । तब उन्हें सेठ छदामी लाल जी जैन मंदिर प्रांगण फिरोजाबाद में परम पूज्य आचार्य श्री 108 वसुनंदी जी महाराज के पास ले जाया गया । आचार्य श्री ने उन्हें संघ में सानिध्य देकर सप्तम प्रतिमा के व्रत देकर ब्रह्मचारिणी संयम प्रभा दीदी नाम दिया और उन्हें सोलहकारण पर्युषण पर्व के पावन अवसर पर 16 सितंबर को क्षुल्लिका दीक्षा देकर श्री 105 सर्वज्ञनंदनी नाम दिया। तब से संल्लेखनारत हैं। ज्ञात हो बीनु जैन स्व. श्री पन्नालाल जी अगरैया निवासी मुरार की नातिनी, स्व. श्रीमति व्रजेश स्व.श्री महेश चंद्र जी की पुत्री है व श्री दिनेश चंद्र जी की भतीजी हैं।

आपका ननिहाल श्री भोलाराम जमुना दास जी चडोसिया धौलपुर के यहां था। आपकी शादी 1999 में सम्पन्न हुई थी।सभी उनके पुण्य की अनुमोदना करते हुए भावना भाते हैं कि आप अष्ट कर्मों को नष्ट कर शीघ्र सिद्धालय की ओर गमन करें। अभी आप पूज्य गुरुदेव अभीक्ष्ण ज्ञानोपयोगी आचार्य श्री वसुनंदी जी महाराज के संघ में फिरोजाबाद में संल्लेखना की ओर अग्रसर हैं।

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