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अभिनंदन नाथ भगवान के गर्भ एवं मोक्ष कल्याणक दिवस की गई विश्व शांति कामना 4 रजत कलशों में प्रासुक जल भरकर किया अभिषेक


जैन धर्म के चौथे तीर्थंकर,1008 अभिनंदन नाथ भगवान का गर्भ एवं मोक्ष कल्याणक महोत्सव, राजधानी रायपुर के श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर पंचायत ट्रस्ट मालवीय रोड में भक्ति भाव से मनाया गया। कमेटी के पूर्व अध्यक्ष संजय नायक जैन एवं पूर्व सचिव राजेश जैन रज्जन जैन ने बताया कि 13 मई वैशाख शुक्ल षष्ठी, सोमवार को दिगंबर जैन धर्म के चौथे तीर्थंकर अभिनंदन भगवान का गर्भ एवं मोक्ष कल्याणक दिवस है। इस अवसर पर बड़े मंदिर के जिनालय में प्रातः 8.30 बजे मंगलाष्टक पढ़ कर श्री जी को पाण्डुक शिला में ,श्रीकार लेखन कर विनय भाव से विराजमान किया गया। पढि़ए प्रणीत जैन की रिपोर्ट ……


रायपुर। जैन धर्म के चौथे तीर्थंकर,1008 अभिनंदन नाथ भगवान का गर्भ एवं मोक्ष कल्याणक महोत्सव रायपुर के श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर पंचायत ट्रस्ट मालवीय रोड में भक्ति भाव से मनाया गया। कमेटी के पूर्व अध्यक्ष संजय नायक जैन एवं पूर्व सचिव राजेश जैन रज्जन जैन ने बताया कि 13 मई वैशाख शुक्ल षष्ठी, सोमवार को दिगंबर जैन धर्म के चौथे तीर्थंकर अभिनंदन भगवान का गर्भ एवं मोक्ष कल्याणक दिवस है। इस अवसर पर बड़े मंदिर के जिनालय में प्रातः 8.30 बजे मंगलाष्टक पढ़ कर श्री जी को पाण्डुक शिला में श्रीकार लेखन कर विनय भाव से विराजमान किया गया। 4 रजत कलशों में प्रासुक जल भरकर और स्थापना करके अभिषेक प्रारंभ किया गया। आज चमत्कारिक सुखशांति प्रदाता शांति धारा की गई ।आज की शांति धारा करने का सौभाग्य प्रवीण जैन मामा को प्राप्त हुआ। आज की शांति धारा का शुद्ध वाचन पूर्व उपाध्यक्ष श्रेयश जैन बालू द्वारा किया गया।तत्पश्चात भगवान की आरती करके अष्ट द्रव्यों से पूजन कर सम्पूर्ण विश्व में सुख, शांति, समृद्धि की कामना करते हुए मंत्रोचार के साथ अर्घ्य समर्पित किए गए।

सांसारिक जीवन से हुआ मोह भंग

जैन धर्म के चौथे तीर्थंकर भगवान अभिनन्दननाथ जी को अभिनन्दन स्वामी के नाम से भी जाना जाता है। अभिनन्दननाथ स्वामी का जन्म इक्ष्वाकुवंशी क्षत्रिय परिवार में माघ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया को हुआ था। अयोध्या में जन्मे अभिनन्दननाथ जी की माता सिद्धार्था देवी और पिता राजा संवर थे। इनका वर्ण सुवर्ण और चिह्न बंदर था। इनके यक्ष का नाम यक्षेश्वर और यक्षिणी का नाम व्रजशृंखला था।अपने पिता की आज्ञानुसार अभिनन्दननाथ जी ने राज्य का संचालन भी किया। लेकिन जल्द ही उनका सांसारिक जीवन से मोह भंग हो गया। जिसके बाद वो राज -पाठ त्याग कर मोक्ष मार्ग पर निकल पड़े।आज के इस मंगलमय धार्मिक आयोजन के अवसर पर महावीर ज्ञान विद्या संघ के सदस्यों के साथ बड़ा मंदिर ट्रस्ट कार्यकारिणी कमेटी के पूर्व अध्यक्ष संजय नायक जैन,पूर्व सचिव राजेश रज्जन जैन,पूर्व उपाध्यक्ष श्रेयश जैन बालू, प्रवीण जैन मामा ,प्रणीत जैन ,शुभम जैन के साथ अन्य धर्म प्रेमी बंधु एवं महिलाएं उपस्थित थी।

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