अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर महाराज और क्षुल्लक अनुश्रमण सागर महाराज के सानिध्य में नेमिनगर जैन कॉलोनी में नौ दिवसीय सिद्धचक्र मंडल विधान के छठे दिन सिद्धों की आराधना करते हुए 256 अर्घ्य मंडल पर समर्पित किए गए। इस अवसर पर मुनि श्री के प्रवचन भी हुए। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…
इंदौर। अंतर्मुखी मुनिश्री पूज्य सागर महाराज और क्षुल्लक अनुश्रमण सागर महाराज के सानिध्य में नेमिनगर जैन कॉलोनी में नौ दिवसीय सिद्धचक्रमंडल विधान का आयोजन किया जा रहा है। इस अवसर पर छठे दिन शुक्रवार को धर्म सभा को संबोधित करते हुए अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज ने कहा कि मिथ्यात्व के साथ पूजा पुण्य का कारण नहीं होती। भगवान अरिहंत की पूजा कर रहे हो तो बिना मिथात्व के करना। यह मान्यता गलत है कि पूजा की विधि में कमी है तो भी पूजा का फल नहीं मिलता है।
सिद्धों के आराधना करने का अर्थ है अपने स्वयं की आराधना क्योंकि हमारी आत्मा भी सिद्धों जैसी है। मिथ्यात्व के कारण आप अपने जीवन में आत्मा को कर्मों से अलग नहीं कर पा रहे हैं। निरंतर हमें अपने स्वयं के स्वरूप को पहचाने में समय लगाना चाहिए। बार- बार मंत्रों का उच्चारण करने से, अर्घ्य चढ़ाने से जो संस्कार पड़ते हैं, वे भी कर्म निर्जरा का कारण बनते हैं।
256 अर्घ्य किए गए समर्पित
इससे पहले गुरुवार को सिद्ध चक्र विधान की आराधना करते हुए मंडल पर 256 अर्घ्य समर्पित किए। भगवान की शांतिधरा करने का लाभ कल्पना अंकित, ऐश्वर्या,उषा बाकलीवाल, तारादेवी ललित जैन,अंजली पंकज जैन,वैशाली मनीष जैन रखियाल गुजरात वाले परिवार, अंशुल,अनिल फ़ूड ऑफिसर ,अंचल,नित्यांश,शोभना, शिवि जैन को प्राप्त हुआ।
मुनि श्री का पाद प्रक्षालन पाद प्रक्षालन उर्मिला ललित जैन,सरला जी कासलीवाल द्वारा किया गया । शास्त्र भेंट महिला मंडल और पिंकी कासलीवाल द्वारा किया गया। सभा का संचालन समाज के महामंत्री गिरिश पाटोदी ने किया और आभार समाज अध्यक्ष कैलाश लुहाड़िया ने व्यक्त किया। विधि विधान का कार्य महेंद्र गंगवाल द्वारा किया गया।














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