हातकणंगले लोकसभा सीट से पिछले 10 साल से किसान नेता राजू जैन शेट्टी जीतते आ रहे हैं। राजू शेट्टी अपनी पार्टी स्वाभिमानी पक्ष की तरफ से एक बार फिर उम्मीदवार हैं। 2014 के चुनाव में उन्होंने बीजेपी के साथ गठबंधन किया था। एनडीए सहयोगी के तौर पर वो हातकणंगले सीट से जीत हासिल की थी, लेकिन इस बार वो एनडीए से अलग होकर यूपीए का हाथ थाम चुके हैं। कौन हैं राजू जैन शेट्टी, पढ़िए इस विशेष रिपोर्ट में…
मुंबई। हातकणंगले लोकसभा सीट से पिछले 10 साल से किसान नेता राजू शेट्टी जीतते आ रहे हैं। राजू शेट्टी अपनी पार्टी स्वाभिमानी पक्ष की तरफ से एक बार फिर उम्मीदवार हैं। 2014 के चुनाव में उन्होंने बीजेपी के साथ गठबंधन किया था। एनडीए सहयोगी के तौर पर वो हातकणंगले सीट से जीत हासिल की थी लेकिन इस बार वो एनडीए से अलग होकर यूपीए का हाथ थाम चुके हैं। राजू शेट्टी के मुकाबले इस बार शिवसेना ने धैर्यशील माणे को चुनाव मैदान में उतारा है।
2014 का चुनावी गणित
एक किसान नेता और एक पत्रिका के संपादक के तौर पर आम लोगों की आवाज बुलंद करने वाले राजू शेट्टी अपने इलाके में काफी पॉपुलर हैं। 2014 के चुनाव में उन्होंने अपने विरोधी को 2 लाख के करीब वोटों के बड़े अंतर से हराया था। राजू शेट्टी को 6 लाख 40 हजार 428 वोट हासिल हुए थे, जबकि दूसरे स्थान पर रहने वाले कांग्रेस के कालप्पा अवाडे को 4 लाख 62 हजार 618 वोट मिले थे। तीसरे स्थान पर निर्दलीय प्रत्य़ाशी सुरेशदादा पाटिल रहे थे। इसके पहले 2009 के लोकसभा चुनाव में भी राजू शेट्टी ने बड़ी जीत हासिल की थी। उन्होंने एनसीपी की निवेदिता माने को हराया था। इस सीट से एनसीपी की निवेदिता माने लगातार 1999 और 2004 के दो चुनाव लगातार जीत चुकी थीं। 2009 में राजू शेट्टी ने 4 लाख 81 हजार 25 वोट हासिल किए जबकि निवेदिता माने को 3 लाख 85 हजार 965 वोट मिले।
कौन हैं किसान नेता राजू शेट्टी
पेशे से किसान और पढ़ाई से मैकेनिकल इंजीनियर राजू शेट्टी के राजनीति में आने और किसानों के हक की लड़ाई शुरू करने की कहानी बेहद दिलचस्प है। राजनीति में कदम रखने से पहले राजू शेट्टी किसानों के बड़े नेता रहे शरद जोशी के साथ कई सालों तक जुड़े रहे। 2002 में उन्होंने जिला परिषद का चुनाव लड़ा और चीनी मिल के वायस चेयरमैन को हरा दिया। हार से बौखलाए समर्थकों ने राजू के साथ मारपीट कर खेतों में फेंक दिया। कुछ किसानों ने उनकी जान बचाई जिसके बाद उन्होंने किसानों के हित में काम करना शुरू कर दिया।
किसानों पर अच्छी पकड़
राजू शेट्टी 2004 में पहली बार विधायक बने। उसके बाद 2009 में पहली बार लोकसभा सांसद बने। 2014 में दोबारा सांसद चुने गए। इसी साल उन्होंने अपनी पार्टी स्वाभिमानी शेतकारी संगठन का भी गठन किया। राजू शेट्टी का दावा है कि जिला परिषद से लेकर लोकसभा चुनाव तक उन्होंने सिर्फ किसानों से मिले चंदे के पैसे से ही लड़ा है। राजू शेट्टी की पश्चिमी महाराष्ट्र के किसानों पर अच्छी पकड़ है जिसकी वजह से 2014 विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने उन्हें अपने साथ मिला लिया था लेकिन अब 3 साल बाद उनका एनडीए से मोहभंग हो रहा है।
सरकार को डाला संकट में
राजू शेट्टी ने सरकार को उन्होंने सबसे बड़े संकट में डाल दिया है। पिछले महीने उन्होंने किसानों की बदहाली और कर्ज माफी को लेकर पुणे से मुंबई तक आत्मकलेश यात्रा निकाली। इसी यात्रा के बाद महाराष्ट्र में किसानों के आंदोलन की नींव तैयार हुई। राजू शेट्टी अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 3 साल पुराना वादा याद दिला रहे हैं। राजू शेट्टी अपने ही सरकार से आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं।











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