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श्री कल्पद्रुम महामंडल विधान को लेकर पत्र - 5 : ऐसा प्रबल पुण्य का अवसर पहले कभी नहीं मिला – राजेश – नीता जैन


अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज एवं क्षुल्लक अनुशासन सागर महाराज के सानिध्य में श्री दिगंबर जैन नव ग्रह ग्रेटर बाबा परिसर में 30 दिसंबर 2023 से 7 जनवरी तक श्री कल्पद्रुम महामंडल विधान का समारोह आयोजित किया गया। पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए नीचे दिए गए जाने वाले प्रतिष्ठित श्रीफल पत्रकारिता पुरस्कार समारोह का आयोजन भी इसी कार्यक्रम में किया गया। कार्यक्रम के बाद समाज के विभिन्न श्रेष्ठजनों ने विधान की भव्यता को लेकर मुनि श्री को लिखा है। इसके पांचवी एपिसोड में पढ़ें नीता-राजेश जैन के विचार…


जय जिनेन्द्र

पवित्र स्थल नवग्रह जिनालय ग्रेटर बाबा मंदिरजी परिसर में अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज एवं क्षुल्लक अनुशासन सागर महाराज के सानिध्य में नौ दिव्य श्री कल्पद्रुम महामंडल में भव्य धार्मिक भावपूर्ण वातावरण की स्थापना हुई। मुझे यह बात सबसे अच्छी लगी कि नौ देवता भव्य श्री कल्पद्रुम महामंडल में मुनिश्री ने कहा था कि जैन धर्म भाव प्रधान है। आप भाईयों-बहनों के साथ पूजा करोगे, कृषकों का अधिक पुण्य उपभोग करोगे। यहां हम भक्ति करने आते हैं, वही करना चाहिए।

ग्रेटर बाबा मंदिरजी परिसर में साक्षात ही समवशरण बना। कितने सुंदर झंडे, मानस्तंभ, धर्मचक्र, तोरण द्वार, कल्पवृक्ष बने हुए थे। पांडाल के बीच में गंधकुटी में चतुर्मुखी मूर्ति की मूर्ति थी। सारा मंडल मनो गोल्डन की आभा जैसी चमक रही थी। परम पूजनीय पूज्य सागर जी महाराज तो जब इन सभी का सहज सरलता का वर्णन करते हैं तो ऐसा लगता है कि मानो उन्हें साक्षात् सारी वस्तुएं दिख रही हैं। वह हमसे कई बार कहते हैं कि इस कल्पद्रुम विधान को तो सीखा ही देते थे। पावन धरा में स्थापना से ही दर्शन में देखने को मिला कि समवशरण मंडल के दिशाओं में इंद्रगण पूजा कर रहे थे। मंडल के सामने इन्द्र-इन्द्राणियों ने अपने परिवार सहित भक्ति भाव से शिक्षा का पूरा आनंद लिया। इस स्वर्ग से पर्यावरण में तो पूरे दिन ऐसा निकल गया था कि समय की कोई बात ही नहीं थी। नौ देवताओं के भव्य विधान में सुबह 6 बजे से ही मंत्रों का जाप होता था। इसके बाद सात बजे से जलयात्रा विधि, अभिषेक विधि, पूजा मुनिश्री के प्रवचन और उपदेश करने में एक बजे, पता ही नहीं चला।

मुनिश्री के द्वारा की गई पूजाओं की सबसे बड़ी विशेषता यही रही कि बहुत ही सरल भाषा में नई-नई छंदों का प्रयोग किया गया। जब संगीत से वे पूजनीय होते थे तो लोग ज़ूम कहते थे। अंतिम दिन देखने में आया कि एक पूजा हुई, जिसमें करीब पन्द्रह सौ भक्त मौजूद थे। संकल्प करने वाले लोगों को पूरे दिन बैठने पर भी भूख-प्यास की कोई बाधा ही नहीं मिली। तीनरस आनंद में वे निमग्नरहते थे। यह बात तो मैंने स्वयं एक नवदेवता पूजा में अनुभव की। राग-रागिनी के साथ-साथ एक-एक शब्द का अर्थ हृदयंगम हो रहा है।

नौ दिव्य इस समारोह के सभी भक्तों के साथ दिन-रात अपनी निस्वार्थ सेवा भाव समर्पित करने वाले सभी साधकों की सराहना की जाए, शायद बहुत कम ही होगी..

साथ ही नवग्रह जिनालय के संस्थापक एवं दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद, शीशमहल इंदौर के अध्यक्ष नरेंद्र -शकुंतला जी जैन वेद एवं समस्त परिवार के साथ सभी सम्मानित समाजजन कार्यकर्ता एवं नवग्रह जिनालय के भक्तों को इस शांतिप्रिय शानदार भव्य धार्मिक संस्था की स्थापना की बहुत-बहुत बधाई मंज़ूरा ।।

नीता -राजेश जैन

एल आई जी कॉलोनी

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