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मनु दीदी बनीं जैन साध्वी क्षुल्लिका सुधर्म नंदनी माताजी : संयम के मार्ग पर चलना सहज नहीं हैं -आचार्य वसुनंदी जी


जैन तीर्थ श्री जम्मूस्वामी तपोस्थली बोलखेड़ा (कामा) में जैनाचार्य श्री वसुनंदी जी महाराज को मनु जैन ने क्षुल्लिका दीक्षा देने के लिए श्रीफल अर्पित कर निवेदन किया। जैनाचार्य वसुनंदी महाराज ने मुरैना की मनु जैन को क्षुल्लिका दीक्षा प्रदान की। पढ़िए मनोज नायक की रिपोर्ट…


मुरैना। वर्तमान समय में दीक्षा लेना बड़ा ही कठिन कार्य है। यूं कहें कि कांटों से भरा ताज पहनने के समान है तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। किंतु यदि किसी कठिन कार्य को करने की ठान लें तो फिर सरल ही लगने लगता है। जैनेश्वरी दीक्षा बिरले ही ले पाते हैं क्योंकि ये संयम का मार्ग है। इस पर चलना स्वयं के जीवन को परिवर्तित कर मोक्ष मार्ग की ओर प्रवत्त करना है। उक्त प्रवचन जैनाचार्य वसुनंदी महाराज ने जम्बूस्वामी तपोस्थली बोलखेड़ा पर आयोजित दीक्षा समारोह में जैन श्रावकों से व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि जीवन के किसी भी क्षण में वैराग्य उमड़ सकता है, संसार में रहकर प्राणी संसार को तज सकता है। उक्त पंक्तियों को चरितार्थ कर दिखाया मुरैना की मनु जैन ने। मनु जैन ने आज जैनेश्वरी दीक्षा ग्रहण की और अब उन्हें जैन साध्वी क्षुल्लिका 105 श्री सुधर्म नंदिनी नाम से पहचाना जायेगा।

प्रदान की दीक्षा की स्वीकृति

जैन तीर्थ श्री जम्मूस्वामी तपोस्थली बोलखेड़ा (कामा) में जैनाचार्य श्री वसुनंदी जी महाराज को मनु जैन ने क्षुल्लिका दीक्षा देने के लिए श्रीफल अर्पित कर निवेदन किया। आचार्यश्री ने मनु की संयम साधना को देखते हुए उन्हें दीक्षा की स्वीकृति प्रदान की।

दीक्षा देने से पूर्व आचार्य श्री ने मनु जैन के परिजनों, रिश्तेदारों, उपस्थित जन समुदाय एवं संघस्थ सभी साधुओं से दीक्षा के लिए स्वीकृति प्राप्त की। दीक्षार्थी मनु दीदी ने संसार के सभी जीवों से जाने-अनजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमा याचना की और अपनी ओर से सभी जीवों को क्षमा किया।

उतार फेंके आभूषण

दीक्षा संस्कारों से पूर्व दीक्षार्थी मनु दीदी ने एक- एक करके सभी स्वर्ण आभूषणों को उतार कर फेंक दिया। आज से वे जैन साध्वी क्षुल्लिका सुधर्म नंदिनी माताजी के नाम से जानी जाएंगी। दीक्षा उपरांत सधर्मी बंधुओं ने नव दीक्षार्थी को मयूर पंख पिच्छिका, कमंडल, जाप माला, आहार पात्र, वस्त्र, शास्त्र आदि भेंट किए।

दीक्षा के पावन अवसर पर मुरैना, ग्वालियर, अंबाह, दिल्ली, अजमेर, कांकरोली, जयपुर, कामा, सीकर, कामा सहित सम्पूर्ण भारत वर्ष से सैकड़ों की संख्या में सधर्मी बंधु उपस्थिति थे। जम्बू स्वामी तपोस्थली बोल खेड़ा के अध्यक्ष रमेश गर्ग, महामंत्री अरुण जैन बंटी, कोषाध्यक्ष किशोर जैन डीग, उपाध्यक्ष अजय जैन दिल्ली द्वारा अतिथियों का सम्मान भी किया गया। कार्यक्रम का संचालन संजय जैन बड़जात्या कामा द्वारा किया गया।

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