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दिल्ली में गूंजेगी जैन समाज की आवाज: रामलीला मैदान में “तीर्थ बचाओ धर्म बचाओ” जन आंदोलन कल 


देश के विभिन्न हिस्सों में कुछ असामाजिक तत्वों के द्वारा जैन तीर्थ क्षेत्रों पर अतिक्रमण की घटनाएं निरंतर बढ़ती जा रही हैं। इसके विरोध विश्व जैन संगठन द्वारा दिल्ली के रामलीला मैदान में धर्म बचाओ तीर्थ बचाओ आंदोलन की शुरुआत 17 दिसंबर से हो रही है। इस आन्दोलन के लिए पूरे जैन समाज में काफी जोश है, पिछले कई दिनों से लगातार जगह-जगह वाहन रैली और मशाल जुलुस निकालकर समाज के लोगों का आवाहन किया गया की ज्यादा से ज्यादा संख्या में रामलीला मैदान में पहुंचकर एकजुटता का सन्देश दें। पढ़िए राखी जैन की विशेष रिपोर्ट 


दिल्ली के रामलीला मैदान में कल पूरे देश का जैन समाज अपने तीर्थों के संरक्षण के लिए आवाज उठाएगा। विश्व जैन संगठन के आह्वाहन पर 17 दिसंबर रविवार को बड़ी संख्या में समाज के एकत्र होने की उम्मीद है. विश्व जैन संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय जैन दिल्ली ने बताया की इस जनआंदोलन के लिए सभी का भरपूर साथ मिल रहा है। संतों का आशीर्वाद भी साथ है। सूचना है की की देश के अलग-अलग कोनों से जैन समाज विभिन्न साधनों से रामलीला मैदान पहुँच रहा है। आंदोलन के मंच पर कोई छोटा-बड़ा नहीं होगा, ये जन आंदोलन समस्त जैन समाज का है। विश्व जैन संगठन की इंदौर इकाई के अध्यक्ष मयंक जैन और प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया की इंदौर, शिवपुरी, भिंड,चंदेरी,अशो नगर और गुना से भी बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग बसों और अपने साधनों से पहुंचेंगे।

राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम सौंपा जाएगा ज्ञापन 

विश्व जैन संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय जैन दिल्ली ने बताया की आंदोलन के माध्यम से माननीय राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा. ज्ञापन के जारी जैन समाज की क्या मांगें है आपको भी बताते हैं.

निवेदन है कि 22 वें जैन तीर्थकर नेमिनाथ भगवान ने गुजरात के जूनागढ़ में सबसे पवित्र गिरनार पर्वतराज की 5 वीं टोंक से मोक्ष प्राप्त किया था और श्री कृष्ण भगवान के पुत्र श्री प्रद्युम्न कुमार ने गिरनार पहाड़ी की चौथी टोंक व श्री शंभु कुमार ने गिरनार पहाड़ी की तीसरी टोंक और श्री अनिरुद्ध कुमार पौत्र भगवान श्री कृष्ण ने गिरनार पहाड़ी की दूसरी टोंक से मोक्ष प्राप्त किया था।

जूनागढ़ की राजकुमारी राजुल ने भी नेमिकुमार (तीर्थकर नेमिनाथ) द्वारा दीक्षा लेने के बाद गिरनार पर्वत की प्रथम टोंक पर घनघोर तप किया था! गिरनार पर्वत से 72 करोड़ 700 सौ जैन साधुओं ने भी मोक्ष प्राप्त करने का उल्लेख जैन शास्त्रों में है और इसी कारण गिरनार पर्वत भी सर्वोच्च जैन तीर्थ श्री सम्मेद शिखर जी के समान पूजनीय तीर्थ स्थल है।

  1. गिरनार की 5 वी टोंक “भगवान् नेमिनाथ की मोक्षस्थली” पर पाषाण में भगवान नेमिनाथ के “चरण चिन्ह” और “प्रतिमा” उत्कीर्ण हैं, जिसकी पुष्टि गुजरात सरकार द्वारा वर्ष 1964 में प्रकाशित की गयी एक वीडियो भी करती है।
  2. गुजरात राज्य ने पांचवी टोंक को गुरु दत्तात्रेय शिखर, चौथे टोंक को औघड़नाथ शिखर, तीसरे टॉक को गुरु गोरखनाथ शिखर नाम से वर्णित किया है लेकिन जैन तीर्थकर नेमिनाथ, प्रद्युम्न कुमार, शंभु कुमार, अनिरुद्ध कुमार और राजुलमती का कहीं भी उल्लेख नहीं किया गया है, जबकि गुरु दत्तात्रेय, औघड़नाथ और गुरु गोरखनाथ के नामों का ऐतिहासिक रूप से उपरोक्त टोंकों से कोई संबंध नहीं है और न ही गिरनार के प्राचीन शिलालेखों में उल्लेख मिलता है।
  3. जैन तीर्थ क्षेत्र गिरनार की सभी टोंको पर पंडों द्वारा जैनियों को वर्ष 2004 से दर्शन और पूजा-अर्चना में व्यवधान उत्पन्न किया जाता है और विशेषरूप से 5 वीं टोंक के अंदर प्रवेश करने वाले जैन तीर्थयात्रियों को रोकना और उनके साथ गाली गलौज, मारपीट करना एवं अभद्र व्यवहार किया जाता है।
  4. दिनांक 1 जनवरी 2013 को महंत मुक्तानंदगिरि ने पूज्य जैन मुनि श्री प्रबल सागर जी पर बेरहमी से प्राणघातक हमला किया था। जूनागढ़ में महंत मुक्तानंदगिरि के खिलाफ यह आपराधिक मामला उनकी मृत्यु के कारण समाप्त कर दिया गया है।
  5. असामाजिक तत्वों ने 2004 में पांचवी टोंक में मोक्षस्थल के अंदर अवैध निर्माण करके श्री दत्तात्रेय मूर्ति स्थापित कर उक्त संरक्षित स्मारक के चरित्र को बदल दिया है।

    उपरोक्त सम्बन्ध में माननीय गुजरात उच्च न्यायालय ने स्पेशल लीव पेटिशन नंबर 2684/2004 में दिनांक 08.06.2004 को यथास्थिति बनाये रखने के आदेश पारित किये थे एवं दिनांक 17.02.2005 को अंतरिम आदेश पारित करते हुए सभी जैन श्रद्धालुओं, दत्तात्रेय और पर्यटकों को बिना किसी बाधा के पूजा करने और स्थल पर जाने का अधिकार दिया था।

  6. दिनांक 1 अक्टूबर 2023 को जैन श्रद्धालुओं के एक समूह ने उक्त स्थल पर दर्शन करने का कार्यक्रम बनाया था, जिसकी पूर्व सूचना दिनांक 30.09.2023 को जिला प्रशासन और पुलिस विभाग को सुरक्षा प्रदान करने हेतु दी थी, लेकिन जैन यात्रियों को कोई सुरक्षा प्रदान नहीं की गई और दर्शन के दौरान वहाँ पर उपस्थित पंडो द्वारा धारदार हथियारों से तीर्थ यात्रियों पर प्राण घातक हमला और दुर्व्यवहार किया गया था।

आज हमारे शहर में आयोजित विशाल विरोध रैली व सभा के माध्यम से हम विश्व जैन संगठन द्वारा नयी दिल्ली के प्रसिद्ध रामलीला मैदान सहित सम्पूर्ण देश में संयोजित देशव्यापी जैन ‘तीर्थ बचाओ धर्म बचाओं’ जनआन्दोलन का समर्थन करते हुए निवेदन करते है कि-

1.पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 के अनुसार गुजरात में गिरनार पहाड़ियों और 5 वी टोंक पर किए गए अवैध और अनधिकृत निर्माण/संरचनाओं को हटाकर 15 अगस्त 1947 की जैन टोंक वाली स्थिति बहाल की जाए।

2.जैन अनुयायियों के लिए जैन पद्धति अनुसार पूजा, अभिषेक और सामग्री चढ़ाने की अनुमति प्रदान की जाए।

3.पांचवीं टोंक पर पाषाण में उत्कीर्ण भगवान नेमिनाथ की पद्मासन प्रतिमा को श्रद्धालुओं को दर्शन हेतु सार्वजनिक किया जाए और प्रतिमा के उपर लिखे शंकराचार्य के स्थान पर भगवान नेमिनाथ लिखा जाए।

4.जैन पुजारी को बैठने की अनुमति प्रदान की जाए।

5. गुजरात सरकार द्वारा पांचवीं टोंक को नेमीनाथ शिखर, चौथी टोंक को श्री प्रद्युम्न कुमार, तीसरी टोंक को श्री शंभु कुमार और दूसरी टोंक को श्री अनिरुद्ध कुमार टोंक घोषित करते हुए सरकारी दस्तावेज में राजुल गुफा का भी नाम अंकित किया जाए।

6.गिरनार की पांचवीं टोंक सहित सम्पूर्ण पर्वत पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाए।

7.गुजरात उच्च न्यायालय के दिंनाक 17 फरवरी 2005 के आदेश का अनुपालन करने और यात्रियों कि सुरक्षा हेतु चौथी और पांचवी टोंक के बीच में पुलिस चौकी अतिशीघ्र आरम्भ की जाए एवं शिकायत पर तुरंत कार्यवाही कि व्यवस्था हो।

8.गुजरात राज्य में अतिशीघ्र जैन कल्याण बोर्ड की स्थापना की जाए।

9.जूनागढ़ में दिनांक 7 अक्टूबर को प्रेस वार्ता में और 28 अक्टूबर 2023 को सार्वजनिक सभा में पूर्व सांसद महेश गिरी द्वारा जैन धर्म, संतो और समाज को झूठे तथ्यों के आधार पर बदनाम करने, दो सम्प्रदाओं को आपस में लड़ाने, जैनों को गिरनार पर यात्रा न करने जाने के लिए हिंसा का डर दिखाने आदि के लिए हिंसा का डर दिखाने आदि गैर संवैधानिक गतिविधियां किये जाने पर सख्त कार्यवाही की जाए और विश्व जैन संगठन द्वारा दिनांक 3 नवम्बर 2023 को प्रेषित शिकायत पर तुरन्त कार्यवाही के आदेश जारी करे। आपकी अति कृपा होगी।

 

रामलीला मैदान नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के पास है। मैदान में एंट्री गेट न. 7 और 8 से होगी

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