देवी अहिल्या विश्वविद्यालय से मान्यता प्राप्त शोध संस्थान कुंद कुंद ज्ञानपीठ द्वारा जैन धर्म के शास्त्रों को सरलता से समझने के लिए जैन आगमों की प्राचीन भाषा प्राकृत के अध्ययन अध्यापन हेतु निशुल्क पाठ्यक्रम प्रारंभ किया गया है। पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट…
इंदौर। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय से मान्यता प्राप्त शोध संस्थान कुंद कुंद ज्ञानपीठ द्वारा जैन धर्म के शास्त्रों को सरलता से समझने के लिए जैन आगमों की प्राचीन भाषा प्राकृत के अध्ययन अध्यापन हेतु निशुल्क पाठ्यक्रम प्रारंभ किया गया है। संपूर्ण पाठ्यक्रम का प्रशिक्षण सप्ताह में 2 दिन रात्रि 7:30 से 8:30 बजे तक ऑनलाइन द्वारा दिया जाएगा एवं अध्ययन-अध्यापन हेतु पाठ्यक्रम की संपूर्ण फीस एवं व्यय भी कुंद कुंद ज्ञानपीठ द्वारा वहन किया जाएगा।
श्रवणबेलगोला प्राकृत विद्यापीठ से संबद्ध
कुंद कुंद ज्ञानपीठ के अध्यक्ष अमित कासलीवाल ने बताया कि यह पाठ्यक्रम श्रवणबेलगोला प्राकृत विद्यापीठ से संबद्ध है, जिसका शुभारंभ 25 जुलाई को राष्ट्रीय प्राकृत विद्यापीठ श्रवणबेलगोला के निर्देशक जयकुमार उपाध्ये ने किया। उपाध्ये ने प्राकृत भाषा के उत्थान एवं प्रशिक्षण के उद्देश्य से किए जा रहे प्रयासों के लिए कुंद कुंद ज्ञानपीठ की सराहना की और पाठ्यक्रम की सफलता के लिए शुभकामनाएं व्यक्त कीं। इस अवसर पर अतिथि के रूप में उपस्थित रंजना पटोरिया कटनी, अमित कासलीवाल एवं कुंद कुंद ज्ञानपीठ के पदाधिकारी एवं समाज के विशिष्ट जन मौजूद थे। पाठ्यक्रम का प्रशिक्षण शिक्षा प्रकोष्ठ की चेयरमैन संस्कृत एवं प्राकृत भाषा विदुषी प्रोफेसर डॉक्टर संगीता मेहता द्वारा दिया जाएगा।
किया जाएगा पुरस्कृत
अमित कासलीवाल ने बताया कि परीक्षा में उपस्थित एवं श्रेष्ठ अंक प्राप्त करने वाले प्रशिक्षणार्थियों को स्वर्गीय अजीत कुमार सिंह कासलीवाल स्मृति प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत प्रमाण पत्र एवं प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की जाएगी। प्राकृत भाषा को सीखने के इच्छुक विद्यार्थी एवं समाजजन एमजी इस रोड स्थित कुंद कुंद ज्ञानपीठ (56 दुकान के पीछे) कार्यालय पर संपर्क कर आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। कार्यक्रम का संचालन डॉक्टर अरविंद जैन ने किया।













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