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राष्ट्रहित में नारी का योगदान विषयक कार्यक्रम भी होगा : विहसंतसागर जी महाराज ने बताई भक्तामर के नवें काव्य की महिमा   


मेडिटेशन गुरु उपाध्याय श्री 108 विहसंतसागर जी महाराज की सभी भक्तों ने अष्ट द्रव्य से पूजा अर्चना की। गुरुदेव ने भक्तामर स्तोत्र के नवें काव्य में बताया कि सूर्य की तो बात ही क्या ? जब उसकी प्रभा से ही सरोवर में कमल खिल जाते हैं, ठीक वैसे ही आपकी स्तुति तो दूर, आपकी पवित्र कथा से ही प्राणियों के सभी पाप दूर हो जाते हैं। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट….


डबरा। चातुर्मासिक धर्मसभा में उपाध्याय श्री विहसंत सागर महाराज ने कहा कि तीर्थंकर भगवान के 34 अतिशय होते हैं। अतिशय शब्द के अनेक अर्थ हैं जैसे श्रेष्ठता, महिमा, प्रभाव, अधिकता, चमत्कार आदि। आरोग्यमय वर्षा योग समिति द्वारा आचार्य विराग सागर जी मुनिराज का चित्र अनावरण एवं दीप प्रज्वलन करके बड़े ही भक्ति भाव से किया गया। इसके बाद मेडिटेशन गुरु उपाध्याय श्री 108 विहसंतसागर जी महाराज की सभी भक्तों ने अष्ट द्रव्य से पूजा अर्चना की।

गुरुदेव ने भक्तामर स्तोत्र के नवें काव्य में बताया कि सूर्य की तो बात ही क्या ? जब उसकी प्रभा से ही सरोवर में कमल खिल जाते हैं, ठीक वैसे ही आपकी स्तुति तो दूर, आपकी पवित्र कथा से ही प्राणियों के सभी पाप दूर हो जाते हैं। दोपहर कालीन स्वाध्याय में बताया गया कि साधु हमेशा ईयापथ समिति का पालन करते हैं, अर्थात मुनिराज 4 हाथ देखकर चलते हैं। घास, गीली भूमि पर मुनिराज चलते नहीं हैं। निर्ग्रंथ दिगंबर साधु सिर्फ तीर्थवंदना, आहार चर्या आदि करने के लिए ही विहार करते हैं। अन्य शेष क्रिया के लिए विहार नहीं करते।

नगर में राष्ट्रहित में नारी का योगदान आगामी 22 जुलाई को दोपहर 12:00 से 4:00 तक आयोजित किया जा रहा है, जिसमें ग्वालियर, मुरैना, जोरा, आगरा, भितरवार, नरवर, मगरोनी, झांसी, इटावा, भिंड, भोपाल, दिल्ली से महिलाएं शामिल होंगी। आज आरोग्यमय वर्षा योग महिला समिति की बैठक हुई, जिसमें व्यवस्थाएं सौंपी गईं। कार्यक्रम में1000 महिलाओं के शामिल होने की संभावना है।

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