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पंचकल्याणक महोत्सव पर नगर में छाया उल्लास : दान से ही पुण्य का लाभ मिलता है – मुनि श्री आदित्य सागर जी 


उदारता से किया गया दान आपके धन को बढ़ाता है। यह बात 60 फीट रोड, एरोड्रम क्षेत्र में आयोजित पंचकल्याणक महोत्सव के द्वितीय दिवस दिगंबर जैन मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज ने श्रावक-श्राविकाओं को रविवार को जन्म कल्याणक महोत्सव के अवसर पर संबोधित करते हुए व्यक्त किए। पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट…


इंदौर। दान में कंजूसी नहीं, उदारता का भाव होना जरूरी है। तन, मन और धन की उदारता हमेशा जीवन में रखना चाहिए। उदारता से किया गया दान आपके धन को बढ़ाता है। यह बात 60 फीट रोड, एरोड्रम क्षेत्र में आयोजित पंचकल्याणक महोत्सव के द्वितीय दिवस दिगंबर जैन मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज ने श्रावक-श्राविकाओं को रविवार को जन्म कल्याणक महोत्सव के अवसर पर संबोधित करते हुए व्यक्त किए। आपने दान का महत्त्व बताते हुए कहा कि मनुष्य को अपनी शक्ति से अधिक और अपनी सामर्थ्य से कम दान कभी नहीं करना चाहिए क्योंकि दान करने से ही पुण्य का लाभ मिलता है।

श्री दिगम्बर जैन अम्बिकापुरी परमहंस नगर धार्मिक न्यास प्रचार संयोजक डॉ. अभिषेक सेठी राजेश जैन दद्दू ने बताया कि पंचकल्याणक महोत्सव में जन्म कल्याणक महोत्सव मनाया गया। सुबह के सत्र में जाप्यानुष्ठान, अभिषेक, शांतिधारा, नित्यपूजन, गर्भ कल्याणक विधान हुआ। प्रात: 7 बजे से भगवान का जन्म, जन्म कल्याणक का मंचीय कार्यक्रम एवं मुनिश्री के प्रवचन हुए। प्रात: 9.30 बजे जनशक्ति नगर से जन्माभिषेक का भव्य मंगल जुलूस निकाला गया। पांडाल में पांडुक शिला पर तीर्थकर बालक का जन्माभिषेक हुआ।

इस अवसर पर दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद के मंत्री डॉ. जैनेन्द्र जैन, अनिल जैनको, सुदीप जैन, राजेश कानूगो, विजेन्द्र सोगानी, कैलाश लुहाड़िया, प्रदीप बड़जात्या, कमल रांक्का, विकास रारा, चिराग गोधा आदि उपस्थित थे। वहीं बालक आदिकुमार का लाभ श्री विप्रव सोगानी को प्राप्त हुआ था।

सोमवार को मनेगा तप कल्याणक

महोत्सव समिति अध्यक्ष हंसमुख गांधी ने बताया कि 22 मई को तप कल्याणक मनाया जाएगा। सुबह 5.30 बजे जाप्यानुष्ठान, जलाभिषेक, शांतिधारा, नित्य पूजन, जन्म कल्याणक पूजन, नवग्रह शांतियज्ञ एवं प्रात: 9.30 बजे मुनिश्री आदित्य सागर के प्रवचन, मंदिर वेदी शुद्धि एवं संस्कार दोपहर 12.30 बजे तीर्थंकर आदि युवराज की बारात, विवाह, राज्याभिषेक, राजतिलक, 32 मुकुटबद्ध राजाओं द्वारा भेंट, नीलांजना का नृत्य, वैराग्य, दीक्षा पालकी का श्री विहार भगवान की दीक्षा विधि का महोत्सव मनाया जाएगा। 22 मई को ज्ञानकल्याणक, 24 को मोक्ष कल्याणक के साथ ही महोत्सव का समापन होगा।

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