परम पूज्य आचार्य श्री विशुद्धसागर महा मुनिराज के मंगल आशीर्वाद से 12 मई को इतिहास के सुनहरे पन्ने में एक पन्ना और दर्ज हुआ। काकोरी लखनऊ में प्रथम तीर्थेश देवाधिदेव आदिनाथ भगवान की भव्य विशाल 21 फीट पद्मासन प्रतिमा विराजमान हुई है। पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट…
इंदौर/लखनऊ मूर्ति प्रदाता परिवार जन। परम पूज्य आचार्य श्री विशुद्धसागर महा मुनिराज के मंगल आशीर्वाद से 12 मई को इतिहास के सुनहरे पन्ने में एक पन्ना और दर्ज हुआ। काकोरी लखनऊ में प्रथम तीर्थेश देवाधिदेव आदिनाथ भगवान की भव्य विशाल 21 फीट पद्मासन प्रतिमा विराजमान हुई है। इससे पहले प्रथम पद्मासन प्रतिमा 21 फीट 3 इंच की दुर्ग नसिया जी में देवाधिदेव श्री चन्द्रप्रभ भगवान की, द्वितीय पद्मासन प्रतिमा 21 फीट कमल सहित देवाधिदेव शासन नायक देवाधिदेव श्री महावीर भगवान की कुण्डलपुर (नालंदा) बिहार में, तृतीय पद्मासन प्रतिमा 21 फीट देवाधिदेव प्रथम तीर्थेश श्री आदिनाथ भगवान की काकोरी लखनऊ में विराजमान हुई है।
दुर्ग के देवेंद्र कुमार-बीना देवी ,सजल – मयूरी, स्नेह-नेहा ,ब्रा.परी दीदी, अंशी, मोक्षी, सिद्धांशी, वर्धमान अभिजात काला ने परिवार दुर्ग अपने बेटे के जन्म दिन पर ऐसा संकल्प लिया कि आप ऐसे 21 फीट के 24 जिनबिंब स्थापित करेंगे। इसी कड़ी में तीन जिनबिंब स्थापित किए जा चुके हैं। दुर्ग के इस परिवार की दौर दिगंबर जैन समाज के मंत्री डॉ. जैनेन्द्र जैन, आजाद जी जैन बीड़ी वाले, सुशील पांड्या, संजीव जैन संजीवनी, राजेश जैन दद्दू, प्रदीप बड़जात्या, परवार समाज महिला संगठन की अध्यक्ष मुक्ता जैन आदि समाज जन के पुण्य की अनुमोदना की है।













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