श्री यशोदय तीर्थ में आयोजित भव्य श्री पंचकल्याणक महोत्सव एवं चौबीस समवशरण विधान का शुभारंभ घटयात्रा एवं ध्वजारोहण के साथ हुआ। इस अवसर पर मुनि सुधासागर महाराज के प्रवचन भी हुए। पढ़िए राजीव सिंघई की रिपोर्ट…
महरौनी (ललितपुर)। श्री यशोदय तीर्थ में आयोजित भव्य श्री पंचकल्याणक महोत्सव एवं चौबीस समवशरण विधान का शुभारंभ घटयात्रा एवं ध्वजारोहण के साथ हुआ। भगवान अजितनाथ बड़ा जैन मंदिर से घटयात्रा का शुभारंभ हुआ, जिसमें सबसे आगे इंद्राणी मंगल कलश लेकर चल रही थीं। उनके पीछे अष्टकुमारियां नृत्य करती हुई चल रही थीं। शोभायात्रा में आकर्षण का मुख्य केंद्र 108 भगवान जिनेंद्र की प्रतिमाएं थीं, जो श्रावकजन सिर पर धारण कर पंक्तिबद्ध चल रहे थे।
विमान जी में भगवान जिनेंद्र विराजमान थे, जिनका भक्तजनों ने द्वार-द्वार पर आरती उतारकर भावभक्ति की। शोभायात्रा में जगतपूज्य मुनिपुंगव सुधासागर महाराज और क्षुल्लक गम्भीर सागर महाराज की उपस्थिति श्रावकों का उत्साह बढ़ा रही थी। नगरवासियों ने मुनिश्री के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। संगीत की धुनों पर युवक थिरक रहे थे।
शोभायात्रा बड़े मंदिर से प्रारंभ होकर गांधी चौक, इंदिरा चौराहे होते हुए कार्यक्रम स्थल यशोदय तीर्थ पर पहुंची। जहां मंत्रोच्चारण के साथ ध्वजारोहण किया गया, जिसका सौभाग्य डॉ. राजकुमार, पवन, देवेंद्र, मनोज सिंघई को प्राप्त हुआ। पांडाल का फीता खोलकर शुभारंभ करने का सौभाग्य प्रशांत सिंघई बंटी, प्रयुल प्रखर को प्राप्त हुआ।

विराजमान हुए जिनेंद्र भगवान
धार्मिक कार्यक्रम ब्रह्मचारी प्रदीप भैया सुयश के दिशा-निर्देश में संपन्न हुई, जिसमें घटों द्वारा पांडाल शुद्धि, मंडप शुद्धि, समवशरण शुद्धि, मंडल प्रतिष्ठा, मंडल प्रतिष्ठा संस्कार, मंगल कलश स्थापना, शांति कलश स्थापना, अखंड दीप स्थापना एवं पूजन किया गया। समवशरण में भगवान जिनेंद्र विराजमान किये गये।
अपने को कम मत आंको
धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री सुधासागर महाराज ने कहा कि भगवान से कल्याण नहीं, भक्ति से कल्याण होता है। अपने को कभी कम मत आंको, यहां गिनती की जरूरत नहीं, गुणवत्ता की जरूरत है। जहां एक खेत था वहां आज अंतरराष्ट्रीय जैनतीर्थ विश्व की प्रसिद्ध चंद्राकर चौबीसी का निर्माण हो रहा है। ये महरौनी के लोगों का पुण्य है कि महरौनी के भक्तों के पुण्य से तो यशोदय तीर्थ बनाना है। जो अपने तीर्थ के लिए खुश होगा, उसे सारी खुशी मिलेगी।
खुशी की खेती वही है, जहां अपने खुशी के आंसू की खेती कर दो। एक साथ चौबीसी समवशरण विधान में पूजन कर अर्घ्य चढ़ाकर पुण्य की खेती कर लो। इस मौके पर श्री पंचकल्याणक महोत्सव के सभी पात्र उपस्थित रहे। माता-पिता बनने का सौभाग्य आनंद सराफ स्नेहलता जैन, सौधर्म इंद्र कपिल चक्रेश बुखारिया, कुबेर अभय घिया, भरत चक्रवर्ती जिनेश्वर बुखारिया एवं बाहुबली अभिनंदन चौधरी, महायज्ञ नायक अजित जैन खंजाची, ईशान इंद्र महेंद्र बाबा और सानतइंद्र बनने का सौभाग्य ऋषभ कठरया को प्राप्त हुआ। कार्यक्रम में संगीतकार नीलेश एंड पार्टी ने अपने सुमधुर भजनों से सबका दिल जीत लिया।वहीं शोभायात्रा में आकर्षक केंद्र भारत बैंड उदयपुर राजस्थान रहा, जिसने अपने गीत-संगीत से सबका मन मोह लिया।













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