महरौनी (ललितपुर)। जगतपूज्य मुनिपुंगव सुधासागर महाराज एवं क्षुल्लक गम्भीर सागर महाराज के सानिध्य में धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। मुनिश्री ने प्रातः काल भगवान अजितनाथ बड़ा जैन मंदिर आकर मूलनायक के दर्शन किये। मुनिश्री के सानिध्य में अभिषेक और शांतिधारा का आयोजन किया गया।
शांतिधारा करने का सौभाग्य अजित खंजाची, देवेंद्र गुदरापुर, सुखनंदन ककडारी और अजित कठरया को प्राप्त हुआ। मुनिश्री ने यशोदय तीर्थ में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि उन शक्तियों के बारे में चर्चा कर रहे हैं, जिन शक्तियों का हम हमारे पास होकर भी उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। जो नहीं हो, वह तो नहीं है।
जो है, उनके बारे में विचार नहीं कर पा रहे हैं। अतीत को लेकर उदास हैं, भविष्य को लेकर चिंतित हो जाते हैं। वर्तमान की तो खबर ही नहीं है, जिंदगी ऐसे ही गुजर जाती है। जो शक्तियां हैं, उसका उपयोग नहीं कर पा रहे। दुःख में सुख की अनुभूति कर सकते हैं, अग्नि में जल का अनुभव कर सकते हैं। दृष्टिहीनों में भी चक्षु शक्ति होती है, वह अंधेरे का आभास करेगा।
बहरा भी सुनेगा, दूसरे की आवाज न सुनाई दे परन्तु अपनी आवाज का अनुभव होता है। गूंगा अपने आप में बोलता है। ऐसे ही हमें दुनिया क्या मानती है, इससे मतलब नहीं रखना। तुम अपने आप को क्या मानते हो, यह महत्वपूर्ण है।
दान देने पर हों प्रफुल्लित
धर्म साध्य है, साधन नहीं। जो दान दाता होता है, उसके पुण्य की अनुमोदना करनी चाहिए। उसके दान पर प्रफुल्लित होना चाहिए। कमल भी सूर्य की ऊंचाइयां देखकर प्रफुल्लित हो जाता है। सूर्य की किरण के साथ वह खिलकर फूल जाता है। संचालन ब्रह्मचारी प्रदीप भैया सुयश और नितिन शास्त्री ने किया।
मुनिश्री सुधासागर को आहार कराने का सौभाग्य रतनचंद डोगरया और क्षुल्लक गम्भीर सागर को आहार देने का सौभाग्य आमोद चौधरी को प्राप्त हुआ।मड़ावरा जैन समाज के भक्तगण वाहन रैली निकालकर कर मड़ावरा से महरौनी यशोदय तीर्थ आये और मुनिपुंगव सुधासागर महाराज से सानिध्य के लिए श्रीफल अर्पित कर निवेदन किया। इस अवसर पर झांसी जैन समाज कमेटी ने भी श्रीफल अर्पित किया।













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