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मोक्ष मार्ग आरोहण : दीक्षार्थी आदेश्वर पचौरी की भव्य जैनेश्वरी दीक्षा 13 फरवरी को 

 सारांश

दीक्षार्थी आदेश्वर पचौरी को भव्य जैनेश्वरी दीक्षा आगामी 13 फरवरी को मदनगंज-किशनगढ़ में पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधि परम पूज्य आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज प्रदान करेंगे। दीक्षार्थी पचौरी का भव्य बिनौली और छौल भराई कार्यक्रम 11 फरवरी को होगा, वहीं 12 फरवरी को वृहद प्रत्याख्यान और श्री गणधर वलय विधान होगा। पढ़िए अशोक कुमार जेतावत की विस्तृत रिपोर्ट… 


धरियावद। दीक्षार्थी आदेश्वर पचौरी की भव्य जैनेश्वरी दीक्षा आगामी 13 फरवरी को मदनगंज-किशनगढ़ स्थित श्री सूरजदेवी पाटनी सभागृह (क्रिस्टल पार्क के सामने) में होगी। उन्हें दीक्षा पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधि परम पूज्य आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज प्रदान करेंगे। इससे पहले दीक्षार्थी पचौरी का भव्य बिनौली और छौल भराई कार्यक्रम 11 फरवरी को होगा। बिनौली जुलूस के रूप में श्री मुनिसुव्रतनाथ मंदिर से आर. के. कम्युनिटी सेंटर पहुंचेगी, जहां गोद भराई की जाएगी। इसके बाद 12 फरवरी को वृहद प्रत्याख्यान और श्री गणधर वलय विधान होगा। श्री मुनि सुव्रतनाथ दिगंबर जैन पंचायत के अध्यक्ष विनोद पाटनी और मंत्री सुभाष बड़जात्या ने बताया कि इस अवसर पर आचार्य़ श्री के पूजन के बाद उनके प्रवचन भी होंगे। इसी दिन शाम को भजन संध्या आयोजित की जाएगी, जिसमें कुचामन सिटी के अजित पांड्या एंड पार्टी भजन प्रस्तुत करेगी।

विदाई समारोह में किया बहुमान 

दीक्षार्थी आदेश्वर पचौरी का विदाई समारोह उनके निवास पर धरियावद में आयोजित हुआ। कार्यक्रम में नगर से बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित थे। इस अवसर पर दीक्षार्थी के मंगल उद्बोधन हुए। दीक्षार्थी परिवार द्वारा दीक्षार्थी का बहुमान किया गया। गृह त्याग एवं विदाई के भावुकता के क्षण ने सभी को भाव विभोर कर दिया। तत्पश्चात् शुभ मुहूर्त में किशनगढ़ के लिए प्रस्थान किया। सभी समाजजन ने दीक्षार्थी को विदाई दी।

धार्मिक कार्यों में अग्रणी रहे हैं पचौरी

दीक्षार्थी आदेश्वर पचौरी शुरू से साधु-संतों का चौका लगाते थे। पारिवारिक कार्यों में भी बढ़- चढ़कर हिस्सा लेते थे। उन्होंंने स्वाध्याय मंडल की स्थापना की थी और जैन पाठशाला मे रुचि लेकर जैन पाठशाला चलाते थे। वह किराना व्यापारी रहेेेेेे लेकिन आर्यिका श्री विशुद्धमति माताजी की आज्ञानुसार उन्होंने लहसुन, प्याज, आलू और पटाखों का त्याग किया था। उन्होंने पिछले कुछ वर्षों से धार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ने के कारण व्यापार का त्याग कर दिया था। परिवार और समाज से दूरी बनाकर वह अपना समय पूजा-पाठ में व्यतीत करने लगे थे। उन्होंने मऊ अतिशय क्षेत्र के पदमप्रभु मंदिर विकास कार्य भी करवाया था।

दीक्षार्थी का परिचय

दीक्षार्थी आदेश्वर पचौरी का गृहस्थ नाम आदेश्वर पचौरी है। उनका जन्म पांच मई, 1955 को खुंता में हुआ था। उनके पिता का नाम जड़ावचंद पचौरी और माता का नाम सागर बाई है। वह हायर सेकेंडरी तक लौकिक शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं। उन्होंने छहढाला, रत्नकरण श्रावकाचार, तत्वार्थ सूत्र, अष्ट पाहुड, समयसार, द्रव्यसंग्रह सहित अनेक धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन किया है। दीक्षार्थी का विवाह 1976 में पुष्पा देवी से हुआ था। उनकी कुल चार संतानें, दो पुत्र और दो पुत्रियां हैं, जिनके नाम नीलेश, हेमंत, संगीता और मोनिका हैं। दीक्षार्थी कुल आठ भाई-बहन हैं। उनकी मां सागर बाई भी त्यागी रही हैं। दीक्षार्थी आचार्य अभिनंदन सागर जी महाराज से 2 प्रतिमा, आचार्य सुनील सागर जी से 3, 4, 5 प्रतिमा का व्रत ले चुके हैं। वह आचार्य वर्धमान सागर जी से शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं। इसके अलावा भी वह आचार्य अजित सागर जी और आर्यिका विशुद्धमति माताजी से भी शिक्षा ले चुके हैं।

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