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वैरागियों के लिए संसार असार है, रागियों के लिए नहींःमुनि श्री आदित्य सागर

न्यूज़ सौजन्य- राजेश दद्दू 

इंदौर। संसार से हम क्यों नहीं छूट पा रहे हैं, यह सब जानते तो हैं पर मानते नहीं। वैरागियों के लिए संसार असार है लेकिन इस रागियों के लिए नहीं क्योंकि रागी मोह से आक्रांत है। मोह हमें बहिरात्म भाव में रखता है और हमारे ज्ञान का, विवेक का एवं स्वद्रव्य की रक्षा का विनाश करता है। अनुचित को उचित और उचित को अनुचित मानने को विवश करता है। यही सत्य है लेकिन मोह के वशीभूत हम इस सत्य को स्वीकार नहीं कर पाते।
यह विचार मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज ने शुक्रवार को समोसरण मंदिर, कंचन बाग में धर्मसभा में व्यक्त किए । उन्होंने कहा कि शराब का नशा उतर जाता है लेकिन जिसने मोह की मदिरा पी रही है उसका नशा नहीं उतरता और वह अपना विवेक खोकर एवं निजत्व को भूल कर पर तत्व को ही यथार्थ मानता है। मीडिया प्रभारी राजेश जैन दद्दू ने बताया कि मुनि श्री आदित्य सागर जी की प्रतिदिन प्रातः 7:30 से 8:30 तक चिन्मय सदन कंचन बाग में वास्तु एवं नीति विषयक क्लास भी लगती है जिसमें काफी संख्या में महिला, पुरुष उपस्थित होकर ज्ञानार्जन कर रहे हैं। धर्मसभा का संचालन हंसमुख गांधी ने किया।

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