धर्मनगरी इंदौर में वर्ष 2026 का चातुर्मास निर्यापक मुनि श्री 108 सुधासागर जी महाराज ससंघ के पावन सान्निध्य में संपन्न होगा। 26 जुलाई को बड़े गणपति से छत्रपति नगर तक भव्य मंगल प्रवेश शोभायात्रा निकलेगी, जिसमें देशभर से हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। पढ़िए श्रीफल साथी राजेश जैन दद्दू की यह रिपोर्ट।
इंदौर। धर्मनगरी इंदौर को वर्ष 2026 में निर्यापक मुनि, तीर्थ रक्षक मुनि श्री 108 सुधासागर जी महाराज ससंघ का पावन चातुर्मास प्राप्त होने जा रहा है। यह वर्षायोग इंदौर स्थित श्री आदिनाथ जिनालय, छत्रपति नगर (दलालबाग, एरोड्रम रोड) में सम्पन्न होगा। इस समाचार से इंदौर सहित मध्यप्रदेश एवं देशभर के जैन समाज में हर्ष और उत्साह का वातावरण है।
26 जुलाई को होगा भव्य मंगल प्रवेश
धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि 26 जुलाई 2026, रविवार को प्रातः 7 बजे बड़े गणपति चौराहे से भव्य मंगल अगवानी प्रारंभ होगी। शोभायात्रा मल्हारगंज, राजबाड़ा, नरसिंह बाजार, मालगंज, महेश नगर होते हुए छत्रपति नगर स्थित श्री आदिनाथ जिनालय पहुँचेगी, जहाँ गुरुवर की मंगल देशना होगी।
देशभर से पहुँचेंगे श्रद्धालु
आयोजकों के अनुसार मध्यप्रदेश के भोपाल, जबलपुर, सागर, अशोकनगर, गुना, उज्जैन, देवास, ललितपुर सहित राजस्थान के जयपुर, कोटा, अजमेर, किशनगढ़ एवं अनेक नगरों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु इंदौर पहुँचेंगे। आयोजन में हजारों गुरु भक्तों की सहभागिता की संभावना है।
जनप्रतिनिधियों की रहेगी उपस्थिति
ऐतिहासिक मंगल प्रवेश के अवसर पर प्रदेश के वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों एवं गणमान्य नागरिकों के उपस्थित रहने की संभावना व्यक्त की गई है। आयोजन को लेकर प्रशासनिक एवं सामाजिक स्तर पर व्यापक तैयारियाँ की जा रही हैं।
समाज ने किया धर्मलाभ का आह्वान
सकल दिगम्बर जैन समाज धर्म प्रभावना समिति से जुड़े सपना-मनीष गोधा, रानी अशोक डोसी, दीपिका आकाश कोल, तृप्ति हर्ष जैन, आनंद नवीन गोधा, धर्मेन्द्र जैन सिनकेम, विजय पाटोदी, अक्षय कासलीवाल, राहुल जैन स्पोर्ट्स एवं राजेश जैन दद्दू सहित समाजजनों ने सभी मंदिर ट्रस्टों, सामाजिक संगठनों, महिला परिषदों, युवा मंडलों एवं श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर धर्मलाभ प्राप्त करने की अपील की है।
ऐतिहासिक चातुर्मास की ओर बढ़ता इंदौर
समाजजनों का विश्वास है कि निर्यापक मुनि श्री 108 सुधासागर जी महाराज का यह चातुर्मास इंदौर के धार्मिक इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ेगा तथा धर्म, संयम और आत्मजागरण का व्यापक संदेश देगा।













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