जयपुर स्थित श्री टोडरमल दिगम्बर जैन सिद्धान्त महाविद्यालय का 50वाँ स्थापना दिवस समारोह उत्साह और गौरव के साथ सम्पन्न हुआ। विद्वानों, पूर्व विद्यार्थियों एवं वर्तमान छात्रों की उपस्थिति में जैन तत्त्वज्ञान के संरक्षण और प्रचार-प्रसार का संकल्प दोहराया गया। पढ़िए श्रीफल साथी नितिन जैन, जबलपुर की यह रिपोर्ट।
जयपुर। पण्डित टोडरमल सर्वोदय ट्रस्ट, जयपुर एवं श्री कुन्दकुन्द कहान दिगम्बर जैन तीर्थ सुरक्षा ट्रस्ट, मुम्बई द्वारा संचालित श्री टोडरमल दिगम्बर जैन सिद्धान्त महाविद्यालय का 50वाँ स्थापना दिवस समारोह पण्डित टोडरमल स्मारक भवन में उत्साह, श्रद्धा एवं गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। समारोह में देशभर से आए विद्वानों, पूर्व छात्रों, अध्यापकों, वर्तमान विद्यार्थियों एवं समाजजनों ने सहभागिता की।
मंगलाचरण के साथ हुआ शुभारम्भ
समारोह का शुभारम्भ महाविद्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार पर 50वें स्थापना दिवस के उद्घाटन, मंगलगान एवं स्वस्तिक निर्माण के साथ हुआ। धर्मध्वजा के साथ अतिथि एवं विद्यार्थी प्रवचन मंडप पहुँचे, जहाँ उद्घाटन सभा आयोजित की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता पण्डित टोडरमल स्मारक ट्रस्ट के अध्यक्ष सुशील कुमार गोदिका ने की।
विद्यार्थियों ने प्रस्तुत की प्रतिभा
कार्यक्रम का संचालन उपप्राचार्य पण्डित जिनकुमार शास्त्री ने किया। विद्यार्थियों ने संस्कृत एवं अंग्रेज़ी भाषण, काव्य-पाठ, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ, महाविद्यालय की गौरवगाथा तथा चित्र-भेंट के माध्यम से अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। सभी प्रस्तुतियों में जैन दर्शन, गुरु परम्परा एवं तत्त्वज्ञान के प्रति समर्पण का भाव दिखाई दिया।
विद्वानों ने दिया प्रेरक संदेश
समारोह में महाविद्यालय के प्रेरणास्रोत डॉ. हुकमचन्द भारिल्ल का विशेष वीडियो संदेश प्रदर्शित किया गया। उन्होंने महाविद्यालय को जैन तत्त्वज्ञान के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार का महत्वपूर्ण केंद्र बताते हुए विद्यार्थियों को तत्त्वज्ञानमय जीवन जीने की प्रेरणा दी।
इस अवसर पर डॉ. शुद्धात्मप्रकाश भारिल्ल, डॉ. राकेश शास्त्री, डॉ. शांतिकुमार पाटील एवं पण्डित बिपिन शास्त्री ने अपने विचार रखते हुए कहा कि महाविद्यालय ने पिछले पाँच दशकों में देश-विदेश में जैन दर्शन के प्रभावी संवाहकों का निर्माण किया है। उन्होंने इसे शिक्षा, संस्कार, साधना और चरित्र निर्माण का जीवंत केंद्र बताया।
ज्ञान परम्परा को आगे बढ़ाने का आह्वान
प्राचार्य डॉ. शांतिकुमार पाटील ने विद्यार्थियों से जिनवाणी को केवल पढ़ने नहीं, बल्कि जीवन में उतारने का संदेश दिया। वहीं पण्डित बिपिन शास्त्री ने विद्यार्थियों को प्रतिवर्ष सोनगढ़ की साधनाभूमि ले जाने की घोषणा की। सभी वक्ताओं ने समाज से महाविद्यालय की ज्ञान परंपरा को और अधिक सशक्त बनाने में सहयोग का आग्रह किया।
नवसंकल्प के साथ हुआ समापन
समारोह का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि महाविद्यालय भविष्य में भी जैन दर्शन एवं तत्त्वज्ञान के विद्वानों का निर्माण कर समाज के आध्यात्मिक उत्थान में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा। 50वाँ स्थापना दिवस समारोह उपस्थित सभी जनों के लिए प्रेरणा, गौरव और नवसंकल्प का अविस्मरणीय अवसर बना।













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