सागर के श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर, नेहानगर में अष्टानिका महापर्व के अंतर्गत आयोजित श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ 29 जुलाई को हवन एवं जलविहार के साथ संपन्न होगा। चातुर्मास की धार्मिक महत्ता भी बताई गई। पढ़िए श्रीफल साथी मनीष जैन विद्यार्थी की यह रिपोर्ट।
सागर। अष्टानिका महापर्व के पावन अवसर पर श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर, नेहानगर में श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ का आयोजन देश के ख्यातिप्राप्त प्रतिष्ठाचार्य पं. पवन दीवान के निर्देशन में श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ जारी है। नौ दिवसीय यह धार्मिक आयोजन 21 जुलाई से प्रारंभ होकर 29 जुलाई 2026 को हवन एवं जलविहार के साथ संपन्न होगा।
सिद्धचक्र विधान की महिमा
विधान की महिमा का उल्लेख करते हुए बताया गया कि श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान का संबंध श्रीपाल एवं मैनासुंदरी की प्रेरणादायी कथा से जुड़ा है। अष्टानिका महापर्व के दौरान यह विधान आत्मशुद्धि, पुण्यार्जन एवं विश्व शांति की मंगलकामना के लिए विशेष महत्व रखता है।
प्रमुख पात्रों ने संभाली धार्मिक जिम्मेदारियां
महामंडल विधान में विभिन्न धार्मिक पात्रों की जिम्मेदारियां समाज के श्रद्धालुओं को प्रदान की गई हैं। इनमें सौधर्म इन्द्र, ध्वजारोहणकर्ता, श्रीपाल–मैनासुंदरी, कुबेर, महायज्ञ नायक, यज्ञ नायक, ईशान इन्द्र, सनत कुमार इन्द्र, माहेंद्र इन्द्र, भरत, बाहुबली एवं अनंतवीर्य सहित अनेक पात्र श्रद्धापूर्वक अपनी भूमिका निभा रहे हैं।
चातुर्मास का धार्मिक महत्व
आयोजकों ने बताया कि अष्टानिका महापर्व के साथ ही चातुर्मास का शुभारंभ होता है। वर्षा ऋतु में सूक्ष्म जीवों की रक्षा एवं अहिंसा के पालन हेतु दिगंबर साधु-संत चार माह तक एक ही स्थान पर विराजमान रहकर धर्मप्रभावना, स्वाध्याय एवं साधना करते हैं।
सागर में विभिन्न स्थानों पर होंगे चातुर्मास
इस वर्ष सागर में गौराबाई दिगंबर जैन मंदिर में आचार्य श्री विभवसागर जी महाराज, भाग्योदय तीर्थ में निर्यापक मुनि श्री अभयसागर जी महाराज, वर्धमान कॉलोनी में मुनि श्री पदमसागर जी महाराज तथा सुभाष नगर जैन मंदिर में मुनि श्री शाश्वतसागर जी महाराज का चातुर्मास संपन्न होगा।
26 जुलाई को होगी कलश स्थापना
आचार्य श्री विभवसागर जी महाराज के चातुर्मास की मंगल कलश स्थापना 26 जुलाई 2026, रविवार को गौराबाई दिगंबर जैन मंदिर प्रांगण में आयोजित की जाएगी। समाजजनों से अधिकाधिक संख्या में उपस्थित होकर धर्मलाभ प्राप्त करने का आग्रह किया गया है।













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