श्री दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र मक्सी पार्श्वनाथ में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का 59वां दीक्षा दिवस श्रद्धा एवं भक्ति के साथ मनाया गया। मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने अपने प्रेरक प्रवचन में आचार्य श्री के तप, त्याग, चर्या और श्रमण परम्परा में उनके अमूल्य योगदान का स्मरण कराया। पढ़िए श्रीफल साथी राजीव सिंघई की यह रिपोर्ट।
मक्सी पार्श्वनाथ। श्री दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र मक्सी पार्श्वनाथ में परम पूज्य संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महामुनिराज का 59वां दीक्षा दिवस मुनि पुंगव श्री 108 सुधासागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में अत्यंत श्रद्धा, भक्ति एवं उल्लास के साथ मनाया गया। पहली बार इस पावन तीर्थ पर आचार्य श्री का दीक्षा दिवस समारोह आयोजित होने से समाजजनों में विशेष उत्साह देखने को मिला।
59 दीपों से हुई भव्य महाआरती
दीक्षा दिवस के अवसर पर 59 दीपों से भव्य महाआरती की गई। जगत कल्याण की भावना से महाशांतिधारा का सौभाग्य अक्षय कासलीवाल एवं आकाश कोयला परिवार को प्राप्त हुआ, जबकि महाआरती राहुल जैन स्पोर्ट्स परिवार द्वारा सम्पन्न हुई। आचार्य श्री के चित्र का अनावरण पुष्पा कासलीवाल, कैलाश जैन, अमित कासलीवाल एवं धर्मेन्द्र सिमकेम ने किया। दीप प्रज्ज्वलन आनंद नवीन गोधा, हर्ष जैन, विजय पाटोदी, भरत मोदी, हंसमुख गांधी, राजेश जैन दद्दू सहित अन्य प्रमुख समाजजनों ने किया।

आचार्य श्री की चर्या स्वयं आगम का प्रमाण बनी
विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने कहा कि पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने श्रमण परम्परा को नई चेतना और नई ऊर्जा प्रदान की। उन्होंने अपने तप, संयम और निष्कलंक चर्या से यह सिद्ध कर दिया कि आगम केवल ग्रंथों में ही नहीं, बल्कि साधु के जीवन में भी साकार होता है। उनकी साधना ने अनेक विद्वानों को भी उनकी चर्या की तुलना आगम से करने के लिए प्रेरित किया।
महापुरुष अपने आदर्शों से अमर रहते हैं
मुनि श्री ने कहा कि कुछ महापुरुष ऐसे होते हैं जो शरीर से विदा होने के बाद भी समाज के हृदयों में सदैव जीवित रहते हैं। भगवान महावीर का शासन आज भी चल रहा है, उसी प्रकार आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज अपने आदर्शों, तप और त्याग के कारण आज भी करोड़ों श्रद्धालुओं के जीवन का मार्गदर्शन कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि शासक का शासन उसके जीवन तक सीमित होता है, लेकिन तीर्थंकरों और महान संतों का प्रभाव उनके देहावसान के बाद भी युगों तक बना रहता है। यही उनकी वास्तविक महानता है।
साधना से प्राप्त पद ही शाश्वत होता है
मुनि श्री ने कहा कि साधना से प्राप्त सम्मान और पद ही शाश्वत होता है। आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने कभी प्रसिद्धि की इच्छा नहीं की, बल्कि आत्मसाधना को जीवन का लक्ष्य बनाया। उन्होंने स्वयं मंजिल प्राप्त की और उनके द्वारा निर्मित मार्ग पर आज हजारों साधु-साध्वियाँ एवं लाखों श्रद्धालु चल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आचार्य श्री के जीवन को देखकर लोगों ने केवल शास्त्र पढ़ने की अपेक्षा उनके जीवन से धर्म सीखना प्रारम्भ किया। उनका सम्पूर्ण व्यक्तित्व संयम, तप और आगम की जीवंत व्याख्या था।
दीक्षा दिवस बना ऐतिहासिक
मध्यप्रदेश महासभा के विजय धुर्रा ने कहा कि मक्सी पार्श्वनाथ में पहली बार आचार्य श्री विद्यासागर जी का 59वां दीक्षा दिवस मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज के सान्निध्य में मनाया गया। 59 दीपों से महाआरती कर इस दिवस को ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया गया।
श्रद्धालुओं ने लिया आदर्शों पर चलने का संकल्प
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे। सभी श्रद्धालुओं ने आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के तप, त्याग, संयम एवं सेवा के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। धर्मसभा का वातावरण गुरु भक्ति, श्रद्धा एवं आध्यात्मिक भावनाओं से ओत-प्रोत रहा।













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