जयपुर के जनकपुरी–ज्योतिनगर स्थित श्री दिगम्बर जैन मंदिर अपने 47वें वर्ष में पहली बार किसी आचार्य संघ के चातुर्मास का साक्षी बनने जा रहा है। 19 जुलाई को आचार्य श्री 108 आदित्य सागर जी मुनिराज ससंघ का भव्य मंगल प्रवेश होगा। पढ़िए श्रीफल साथी पदम जैन बिलाला एवं राकेश जैन (दूरदर्शन) की यह रिपोर्ट।
जयपुर। श्री दिगम्बर जैन मंदिर, जनकपुरी–ज्योतिनगर ने 17 जुलाई को अपनी स्थापना के 46 वर्ष पूर्ण कर 47वें वर्ष में प्रवेश किया। स्थापना वर्ष के शुभारंभ के साथ ही मंदिर एवं जनकपुरी जैन समाज एक ऐतिहासिक उपलब्धि का साक्षी बनने जा रहा है। वर्ष 2026 में पहली बार यहां किसी आचार्य संघ का चातुर्मास आयोजित होगा, जिसे समाज के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण अवसर माना जा रहा है।
पहली बार मिलेगा चातुर्मास का सौभाग्य
मंदिर प्रबंध समिति के अनुसार जनकपुरी जैन समाज को पहली बार किसी आचार्य संघ के चातुर्मास का सौभाग्य प्राप्त हो रहा है। यह उपलब्धि मंदिर एवं समाज के धार्मिक इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज होगी।
19 जुलाई को होगा भव्य मंगल प्रवेश
आध्यात्मयोगी आचार्य श्री 108 आदित्य सागर जी मुनिराज ससंघ का 19 जुलाई (रविवार) को चातुर्मासार्थ श्री दिगम्बर जैन मंदिर, जनकपुरी–ज्योतिनगर में भव्य मंगल प्रवेश होगा। प्रातःकाल आचार्य श्री ससंघ का मंगल विहार बरकत नगर दिगम्बर जैन मंदिर से प्रारंभ होकर भव्य शोभायात्रा के रूप में जनकपुरी मंदिर पहुंचेगा, जहाँ धर्मसभा का आयोजन होगा।
28वें वर्षायोग पर विशेष आयोजन
आचार्य श्री के 28वें वर्षायोग के उपलक्ष्य में विशेष रूप से 28 स्वागत द्वार बनाए गए हैं। मंदिर में प्रवेश के समय 28 थालों से पाद प्रक्षालन तथा 28 दीपों से मंगल आरती कर श्रद्धा एवं भक्ति के साथ आचार्य श्री का अभिनंदन किया जाएगा।
भव्य तैयारियाँ पूरी
चातुर्मास समिति, मंदिर प्रबंध समिति, महिला मंडल एवं युवा मंच द्वारा मंदिर परिसर तथा पूरे मंगल प्रवेश मार्ग को आकर्षक रूप से सजाया गया है। आयोजन को भव्य एवं व्यवस्थित बनाने के लिए व्यापक तैयारियाँ पूर्ण कर ली गई हैं।
बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना
प्रवेश समारोह एवं धर्मसभा में जनकपुरी, ज्योतिनगर, बरकत नगर, महेश नगर, कीर्ति नगर, मधुबन तथा आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के उपस्थित रहने की संभावना है। समाजजन इस ऐतिहासिक अवसर को लेकर अत्यंत उत्साहित हैं।
धर्म और समाज के लिए प्रेरणादायी अवसर
यह चातुर्मास केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज में धर्म, संयम, संस्कार एवं आध्यात्मिक चेतना को सुदृढ़ करने का महत्वपूर्ण अवसर होगा। जनकपुरी जैन समाज का यह ऐतिहासिक आयोजन आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगा।













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