रेखा संजय जैन, ग्रुप संपादक श्रीफल की कलम से
इंदौर की पुण्यभूमि को परम पूज्य मुनि श्री 108 सुधासागर महाराज का चातुर्मास प्राप्त होना केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए आत्मसाधना, संस्कार और संगठन का महापर्व है। यह अवसर समाज को नई दिशा देने, नई चेतना जगाने और एकजुट होकर भविष्य-निर्माण का संकल्प लेने का है।
इस पुण्य अवसर के लिए सामाजिक संसद के अध्यक्ष आनंद गोधा, कार्यकारी अध्यक्ष नवीन गोधा एवं महामंत्री हर्ष जैन विशेष बधाई और धन्यवाद के पात्र हैं। उनके पुरुषार्थ, समर्पण और सतत प्रयासों ने इंदौर समाज को यह दुर्लभ सौभाग्य दिलाया। पहला कदम उन्होंने बढ़ाया, अब इस यात्रा को पूरे समाज को मिलकर आगे बढ़ाना है।
अब समय किसी एक ,दो,तीन व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे इंदौर समाज का है। प्रत्येक श्रावक-श्राविका यह भाव रखे कि “यह चातुर्मास मेरा है, मेरी साधना का है, मेरे परिवार के संस्कारों का है और मेरे समाज के उज्ज्वल भविष्य का है।” यही भावना मुनि श्री सुधासागर महाराज के संदेश का वास्तविक स्वरूप है।
यह चातुर्मास केवल प्रवचनों तक सीमित न रहे, बल्कि प्रत्येक परिवार में आत्मसाधना की डुबकी, बच्चों में संस्कारों का बीजारोपण, युवाओं में सेवा की प्रेरणा और समाज में संगठन की नई चेतना प्रवाहित करे। जब समाज एक सूत्र में बंधता है, तब धार्मिक विकास की गंगा स्वयं प्रवाहित होती है।
कहा गया है कि सच्ची भक्ति के आगे भगवान भी प्रसन्न हो जाते हैं। इंदौर समाज को यह पुण्य अवसर मिला है, इसलिए इसे केवल उत्सव बनाकर नहीं, बल्कि जीवन-परिवर्तन का माध्यम बनाकर सार्थक करना होगा। आज आवश्यकता है कि बैठकर ऐसी योजनाएँ बनाई जाएँ जिनसे समाज का प्रत्येक व्यक्ति — बच्चे, युवा, महिलाएँ और वरिष्ठजन — किसी न किसी रूप में इस चातुर्मास से जुड़े।
आनंद गोधा, नवीन गोधा और हर्ष जैन जिस प्रकार सभी को साथ लेकर चलने का प्रयास करते हैं, वही उनकी सबसे बड़ी शक्ति है। यही समन्वय और सहभागिता इस चातुर्मास की भी सफलता का आधार बने।
मुनि श्री सुधासागर महाराज का एक प्रेरक संदेश सदैव स्मरणीय है — “समाज का कार्य करोगे तो लड्डू नहीं, पत्थर भी खाने पड़ सकते हैं; फिर भी समाज का मार्गदर्शन और सेवा नहीं छोड़नी चाहिए।” यह वाक्य प्रत्येक समाजसेवी के लिए प्रेरणा है कि सेवा का मार्ग त्याग, धैर्य और समर्पण से ही प्रशस्त होता है।
इसी भावना के साथ यह भी आवश्यक है कि इंदौर में ही नहीं, जहाँ-जहाँ चातुर्मास हो रहे हैं, वहाँ भी सहयोग और सेवा का भाव लेकर पहुँचा जाए। यदि किसी मंदिर या समिति को आवश्यकता हो तो सबसे पहले पूछा जाए — “हम आपकी क्या सेवा कर सकते हैं?” यही जैन संस्कृति का वास्तविक स्वरूप है।
अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्यसागर महाराज ने भी प्रेरणा दी कि परम पूज्य मुनि श्री सुधासागर महाराज का स्वागत, अभिनंदन और चरणवंदन ऐसा हो कि पूरे देश में इंदौर समाज की संगठन-शक्ति और श्रद्धा की मिसाल दी जाए। साथ ही, चातुर्मास से पूर्व आचार्य श्री 108 सुनीलसागर महाराज के नगर-प्रवेश और स्वागत को भी हम सभी मिलकर ऐतिहासिक बनाएँ।
आइए, हम पूरी इंदौर समाज का चातुर्मास बनाएँ। यही समय है जब मतभेदों से ऊपर उठकर मन, वचन और कर्म से एक होकर आत्मकल्याण, समाज-निर्माण और धर्म-प्रभावना का नया इतिहास लिखा जाए।













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