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कालजयी विरासत, समकालीन विमर्श और स्वर्णिम भविष्य की रूपरेखा पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी 12 से : आचार्य श्री सुनीलसागरजी महाराज के सान्निध्य में देशभर के विद्वानों का होगा मंथन


श्री दिगम्बर जैन उदासीन आश्रम ट्रस्ट एवं कुन्दकुन्द ज्ञानपीठ, इंदौर के तत्वावधान में 12 से 14 जुलाई तक “कालजयी विरासत, समकालीन विमर्श और स्वर्णिम भविष्य की रूपरेखा” विषय पर त्रिदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित होगी। देशभर के विद्वान, शोधार्थी और शिक्षण संस्थान इसमें सहभागी बनेंगे। पढ़िए श्रीफल समूह संपादक रेखा संजय जैन की यह रिपोर्ट।


इंदौर। श्री दिगम्बर जैन उदासीन आश्रम ट्रस्ट द्वारा संचालित कुन्दकुन्द ज्ञानपीठ, इंदौर के तत्वावधान में 12, 13 एवं 14 जुलाई 2026 को “कालजयी विरासत, समकालीन विमर्श और स्वर्णिम भविष्य की रूपरेखा” विषय पर त्रिदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की जाएगी। कार्यक्रम आचार्य श्री 108 सुनीलसागरजी महाराज के पावन सान्निध्य एवं मंगल आशीर्वाद में सम्पन्न होगा। संगोष्ठी का उद्देश्य श्रमण संस्कृति, जैन साहित्य, प्राचीन विरासत एवं समकालीन विषयों पर गंभीर विमर्श कर भावी दिशा निर्धारित करना है।

आचार्य संघ का मिलेगा सान्निध्य

संगोष्ठी के प्रेरणास्रोत स्व. देवकुमारसिंह कासलीवाल, स्व. अजित कुमारसिंह कासलीवाल एवं स्व. प्रदीप कुमारसिंह कासलीवाल हैं। आयोजन में अंतर्मुखी मुनि श्री 108 पूज्यसागरजी महाराज तथा मुनि श्री 108 विष्णुसागरजी महाराज का भी विशेष सान्निध्य रहेगा।

उद्घाटन सत्र में होंगे विशिष्ट अतिथि

12 जुलाई को प्रातः 8:45 बजे मंगल प्रवेश एवं 9 बजे उद्घाटन सत्र आयोजित होगा। मुख्य अतिथि मध्यप्रदेश शासन के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय रहेंगे, जबकि महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय, उज्जैन के कुलगुरु डॉ. शिवशंकर मिश्र विशिष्ट अतिथि होंगे। कार्यक्रम में ध्वजारोहण, प्रदर्शनी उद्घाटन, पाद प्रक्षालन, शास्त्र भेंट, चित्र अनावरण, दीप प्रज्ज्वलन एवं श्रीफल अर्पण जैसे आयोजन होंगे। अध्यक्षता इंजी. अमित कासलीवाल करेंगे। सारस्वत वक्ता प्रो. डॉ. जयकुमार उपाध्ये तथा गुणानुवाद प्रो. संगीता मेहता करेंगी। मंगल देशना आचार्य श्री सुनीलसागरजी महाराज प्रदान करेंगे।

तीन दिनों तक होंगे शोधपरक विमर्श

संगोष्ठी के विभिन्न सत्रों में देशभर के विद्वान जैन दर्शन, प्राकृत भाषा, श्रमण संस्कृति, साहित्य, इतिहास तथा समकालीन विषयों पर अपने शोधपत्र एवं विचार प्रस्तुत करेंगे। दूसरे दिन प्राकृत प्रशिक्षणार्थियों का सम्मान किया जाएगा तथा तीसरे दिन सांसद शंकर लालवानी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। समापन अवसर पर ‘पारिसिस्स रख्खा’ विषय पर प्राकृत नाटिका का मंचन भी किया जाएगा।

अनेक शिक्षण संस्थानों की सहभागिता

संगोष्ठी में विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन, तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय, एकलव्य विश्वविद्यालय, एस.ए. यूनिवर्सिटी तथा श्री जी.एस. इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस सहित अनेक शिक्षण संस्थानों की अकादमिक सहभागिता रहेगी। देशभर के शोधार्थी एवं प्राध्यापक इसमें शामिल होकर अपने विचार रखेंगे।

अनेक संस्थाओं का रहेगा सहयोग

आयोजन श्री दिगम्बर जैन उदासीन आश्रम ट्रस्ट एवं कुन्दकुन्द ज्ञानपीठ द्वारा किया जा रहा है। निवेदकों में अमित कासलीवाल, सुशील कासलीवाल, आदित्य कासलीवाल, लोकेश कासलीवाल, ब्र. अनिल जैन एवं डॉ. अरविंद कुमार जैन प्रमुख हैं।

सहयोगी संस्थाओं में दिगम्बर जैन सामाजिक संसद (अध्यक्ष आनंद गोधा, महामंत्री हर्ष जैन), दिगम्बर जैन सोशल ग्रुप फेडरेशन (राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोहर झांझरी, रीजन अध्यक्ष प्रदीप चौधरी), दिगम्बर जैन श्रावकग्राम समवशरण मंदिर ट्रस्ट, दिगम्बर जैन बुकोगंज जैन समाज तथा श्रीमती पूर्णा कासलीवाल, शरद सेठी, सुमत लुहाड़िया एवं हसमुख गांधी सहित अनेक समाजजन सहयोग प्रदान कर रहे हैं।

 

व्यवस्थाओं में जुटी आयोजन समिति

आयोजन समिति में योगेश जैन विनायक, पिन्सपाल टेंग्या, राजेन्द्र सोनी, मुकेश बावलीवाल, अजीत जैन, सुमतजी लुहाड़िया, प्रदीप चौधरी, डॉ. अरविंद कुमार जैन, हसमुख गांधी, इंजी. अनिल कुमार जैन, प्रो. संगीता मेहता, रेखा संजय जैन, राजेश जैन दद्दू, डी.के. जैन (सेवानिवृत्त डीएसपी), बाबूलाल पाण्ड्या, कीर्ति पाण्ड्या, दिलीप पाटनी, सुशील पाण्ड्या, तौसीर पाटनी, प्रदीप कुमार जैन एवं संजय पाण्ड्यावाल सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता व्यवस्थाओं में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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