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अम्बाह में होगा आर्यिकाश्री संगममति माताजी का पावन वर्षायोग : समाज में हर्ष, आचार्य श्री सिद्धांतसागर महाराज से मिली स्वीकृति


जैनाचार्य श्री सिद्धांतसागरजी महाराज की शिष्या आर्यिका रत्न श्री संगममति माताजी का वर्ष 2026 का पावन वर्षायोग अम्बाह में होगा। आचार्य श्री की स्वीकृति के बाद समाज में उत्साह का वातावरण है। पढ़िए श्रीफल साथी मनोज जैन नायक की यह रिपोर्ट।


मुरैना/अम्बाह। धर्म नगरी अम्बाह में इस वर्ष आर्यिका रत्न श्री संगममति माताजी का पावन वर्षायोग आयोजित होगा। जैनाचार्य श्री सिद्धांतसागरजी महाराज की स्वीकृति मिलने के बाद सकल जैन समाज में हर्ष और उत्साह का वातावरण है।

समाज की भावना का मिला सम्मान

हाल ही में अम्बाह आगमन के दौरान आर्यिका श्री संगममति माताजी की प्रेरक प्रवचन शैली एवं वात्सल्य से प्रभावित समाजजनों ने श्रीफल अर्पित कर अम्बाह में वर्षायोग स्थापित करने का निवेदन किया। माताजी ने समाज की भावना का सम्मान करते हुए आचार्य श्री से स्वीकृति प्राप्त करने का निर्देश दिया।

आचार्य श्री ने दी चातुर्मास की स्वीकृति

अम्बाह जैन समाज का प्रतिनिधिमंडल इंदौर के समीप विराजमान आचार्य श्री सिद्धांतसागर महाराज के सान्निध्य में पहुंचा और आर्यिका माताजी के अम्बाह चातुर्मास की अनुमति का निवेदन किया। आचार्य श्री ने समाज की भावनाओं का सम्मान करते हुए वर्षायोग की स्वीकृति प्रदान की तथा धर्मवृद्धि का मंगल आशीर्वाद दिया। प्रतिनिधिमंडल में विमल जैन राजू, शरद जैन, दिलीप जैन, पंकज जैन परेड एवं भारत जैन चीकू शामिल रहे।

चार माह तक चलेगा वर्षायोग

जैन परंपरा के अनुसार वर्षा ऋतु के चार माह जुलाई से अक्टूबर तक संत-साध्वियां एक ही स्थान पर रहकर साधना, स्वाध्याय, प्रवचन एवं धर्म प्रभावना करती हैं। अहिंसा के व्रत के पालन हेतु इस अवधि में विहार नहीं किया जाता, जिससे सूक्ष्म जीवों की रक्षा हो सके।

धर्म, साधना और संस्कार का मिलेगा लाभ

चातुर्मास के दौरान आर्यिका श्री संगममति माताजी के सान्निध्य में प्रवचन, स्वाध्याय, तप, भक्ति एवं विविध धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन होगा। श्रद्धालुओं को ज्ञान, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त करने का विशेष अवसर मिलेगा।

समाज में उत्साह का वातावरण

अम्बाह जैन समाज वर्षायोग को लेकर तैयारियों में जुट गया है। श्रद्धालुओं का मानना है कि माताजी के पावन सान्निध्य से नगर में धर्म प्रभावना को नई गति मिलेगी तथा समाज में आध्यात्मिक जागृति का वातावरण बनेगा।

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