सागवाड़ा की पुनर्वास कॉलोनी में वैज्ञानिक धर्माचार्य कनकनंदी जी गुरुदेव एवं उनके शिष्य मुनि आज्ञासागर जी का भावपूर्ण मिलन श्रद्धालुओं के लिए अविस्मरणीय बन गया। दो दिवसीय प्रतिष्ठा महोत्सव से पूर्व हुए इस गुरु-शिष्य मिलन ने सभी को भावविभोर कर दिया। पढ़िए श्रीफल साथी अजीत कोठिया डडूका (बांसवाड़ा, राजस्थान) की यह रिपोर्ट।
सागवाड़ा। पुनर्वास कॉलोनी में आयोजित दो दिवसीय प्रतिष्ठा महोत्सव से पूर्व विश्व वंदनीय वैज्ञानिक धर्माचार्य कनकनंदी जी गुरुदेव एवं उनके शिष्य मुनि श्री आज्ञासागर जी का वात्सल्यपूर्ण मिलन श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत भावुक एवं प्रेरणादायी क्षण बन गया। गुरु-शिष्य के इस मिलन को देखकर उपस्थित श्रावक-श्राविकाएं भावविभोर हो उठीं।
गुरु चरणों में उमड़ा अपार वात्सल्य
आचार्य श्री अपने शिष्य की अगवानी के लिए निकले थे, तभी मार्ग में दोनों का मिलन हो गया। मुनि श्री आज्ञासागर जी ने गुरु के श्रीचरणों में साष्टांग वंदना की। भावविह्वल होकर उनके नेत्रों से अश्रुधारा बह निकली। गुरुदेव के बार-बार आग्रह करने के बाद ही वे उठे और तीन प्रदक्षिणा कर पुनः विनयपूर्वक नमोस्तु किया। इसके पश्चात आचार्य श्री ने अपने प्रिय शिष्य को स्नेहपूर्वक आलिंगन दिया। इस वात्सल्यपूर्ण दृश्य ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भावुक कर दिया।
साधना और गुरु कृपा का मिला संदेश
श्रद्धालुओं को बताया गया कि गत चातुर्मास के दौरान चावंड में मुनि श्री आज्ञासागर जी अस्वस्थ हो गए थे। उस समय गुरुदेव के आशीर्वाद, मंत्रोच्चारण एवं मार्गदर्शन से उन्हें स्वास्थ्य लाभ प्राप्त हुआ। उनके सरल स्वभाव, साधना और सेवा भावना की भी उपस्थित जनों ने सराहना की।
संघ का हुआ आत्मीय मिलन
इस अवसर पर आर्यिका सु-प्रज्ञाश्री माताजी ने भी अपने दीक्षा गुरु से आशीर्वाद प्राप्त किया। संघ के मुनि श्री सुविज्ञ सागर जी, अध्यात्मनंदी जी, सौम्यनंदी जी, आर्यिका सुवत्सलमति माताजी, भक्तिश्री क्षुल्लिका सहित समस्त संघ ने गुरुदेव के साथ वात्सल्यपूर्ण समाचारी की। सिद्धि रेजिडेंसी से पुनर्वास कॉलोनी तक श्रद्धालुओं में प्रतिष्ठा महोत्सव को लेकर विशेष उत्साह दिखाई दिया।
आचार्य श्री ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर रखे विचार
अपने उद्बोधन में आचार्य श्री ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के संदर्भ में भी विचार व्यक्त किए। उन्होंने बताया कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से उनके साहित्य, प्रवचनों एवं काव्य का व्यापक अध्ययन और विश्लेषण किया जा रहा है। उन्होंने इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया कि तकनीकी माध्यम उनके साहित्य की व्यापक जानकारी प्रस्तुत कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ज्ञान का वास्तविक उद्देश्य मानव जीवन में विवेक, विनय और आत्मकल्याण की भावना को जागृत करना है।
प्रतिष्ठा महोत्सव को लेकर उत्साह
पुनर्वास कॉलोनी में आयोजित होने वाले दो दिवसीय प्रतिष्ठा महोत्सव को लेकर क्षेत्र के श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है। बड़ी संख्या में आसपास के गांवों से भी समाजजन पहुंच रहे हैं और आयोजन की तैयारियों में सक्रिय सहभागिता निभा रहे हैं।
कार्यक्रम की जानकारी श्रीमती विजयलक्ष्मी गोदावत, सागवाड़ा द्वारा प्रदान की गई।













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