एटा के श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़े मंदिर में आर्यिका श्री विजयमती माताजी ने विधि-विधानपूर्वक केशलोंच कर त्याग, तप और आत्मशुद्धि का प्रेरक संदेश दिया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने धर्मलाभ प्राप्त किया। पढ़िए श्रीफल साथी सोनल जैन की यह रिपोर्ट।
एटा। पुरानी बस्ती स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़े मंदिर में आज भक्ति, त्याग और वैराग्य का अनुपम दृश्य देखने को मिला। परम पूज्य सिद्धांत रत्न गणिनी आर्यिका श्री विशुद्धमती माताजी की सुयोग्य शिष्या परम पूज्य बालयोगिनी गणिनी आर्यिका श्री विजयमती माताजी ने विधि-विधानपूर्वक अपना केशलोंच किया। इस अवसर पर मंदिर परिसर श्रद्धालुओं से खचाखच भरा रहा।
केशलोंच का आध्यात्मिक महत्व
जैन महिला संगठन की अध्यक्षा बबिता जैन प्रेरणा ने बताया कि केशलोंच आत्मशुद्धि, निस्पृहता, वैराग्य और सहनशीलता का प्रतीक है। इस कठिन साधना में जैन साधु-साध्वियां अपने केश स्वयं अपने हाथों से उखाड़ती हैं, जो शारीरिक कष्टों पर विजय तथा आत्मसंयम का श्रेष्ठ उदाहरण माना जाता है।
भक्ति और श्रद्धा से गूंजा मंदिर परिसर
माताजी की इस कठिन तपस्या को देखकर अनेक श्रद्धालुओं की आंखें भावविभोर हो उठीं। मंदिर परिसर जयकारों से गूंज उठा और उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं ने माताजी के त्याग एवं तपस्या को नमन करते हुए धर्मलाभ एवं आशीर्वाद प्राप्त किया।
निरंतर हो रहे धार्मिक आयोजन
पंचायत अध्यक्ष योगेश जैन ने बताया कि आर्यिका श्री के पावन सान्निध्य में मंदिर में निरंतर धार्मिक अनुष्ठान, मंगल प्रवचन एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे संपूर्ण क्षेत्र का वातावरण धर्ममय बना हुआ है।
श्रद्धालुओं की रही उपस्थिति
इस अवसर पर योगेश जैन, शैलेन्द्र जैन, प्रमोद जैन, धवल जैन, सुनील बांदा, कुलदीप जैन, संजय जैन, रवीन्द्र जैन, आलोक जैन, प्रदीप जैन, दीपू जैन, नितिन जैन, विनय जैन, रिंकू जैन, अनिल जैन, राजमती जैन, मंजू जैन, शिप्रा जैन, इंद्रा जैन, कुमकुम जैन, सुनीता जैन, आशना जैन, शशी जैन, अंशू जैन, सपना जैन, बबली जैन एवं रानी जैन सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर माताजी का आशीर्वाद प्राप्त किया।













Add Comment