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आचार्य निर्भय सागर ने समझाया णमोकार मंत्र के प्रथम पद का गूढ़ रहस्य : धर्मसभा में अरिहंत परमेष्ठी के स्वरूप और आत्मकल्याण का दिया संदेश


आगरा के श्री शान्तिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में आयोजित धर्मसभा में आचार्य श्री 108 निर्भय सागर जी महाराज ने णमोकार मंत्र के प्रथम पद का गूढ़ आध्यात्मिक रहस्य समझाया। मुनि श्री शिवदत्त सागर जी महाराज ने भी धर्मोपदेश दिया। पढ़िए श्रीफल साथी राहुल जैन की यह रिपोर्ट।


आगरा। श्री शान्तिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर, सेक्टर-7, आवास विकास कॉलोनी, सिकंदरा में परम पूज्य वैज्ञानिक संत आचार्य श्री 108 निर्भय सागर जी महाराज एवं मुनि श्री शिवदत्त सागर जी महाराज ससंघ के सान्निध्य में भव्य धर्मसभा आयोजित हुई। कार्यक्रम का मंगलाचरण एक बालिका द्वारा किया गया। इसके पश्चात दीप प्रज्ज्वलन, पाद प्रक्षालन, शास्त्र भेंट सहित विभिन्न मांगलिक कार्यक्रम श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ संपन्न हुए।

णमोकार मंत्र का गूढ़ अर्थ

आचार्य श्री 108 निर्भय सागर जी महाराज ने अपने प्रवचन में णमोकार मंत्र के प्रथम पद के तीन भिन्न उच्चारणों एवं उनके आध्यात्मिक अर्थों की विस्तृत व्याख्या की। उन्होंने बताया कि आचार्य कुन्दकुन्द स्वामी, पुष्पदंत-भूतबली महाराज तथा धरसेन स्वामी की परंपरा में इन शब्दों का विशेष महत्व है।

अरिहंत परमेष्ठी का स्वरूप

आचार्यश्री ने कहा कि ‘अरि’ का अर्थ शत्रु है और जिन्होंने अपने आंतरिक शत्रुओं अर्थात ज्ञानावरण, दर्शनावरण, मोहनीय एवं अंतराय जैसे चार घातिया कर्मों का पूर्णतः नाश कर दिया है, वे अरिहंत परमेष्ठी कहलाते हैं। ऐसे परम पूजनीय अरिहंतों को तीनों लोकों के सभी जीव नमस्कार करते हैं तथा वे जन्म-मरण के बंधन से मुक्त होते हैं।

मुनि श्री शिवदत्त सागर का धर्मोपदेश

धर्मसभा में मुनि श्री शिवदत्त सागर जी महाराज ने भी श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए धर्म, संयम एवं आत्मकल्याण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। उनके प्रेरक उद्बोधन को श्रद्धालुओं ने अत्यंत श्रद्धा के साथ श्रवण किया।

बच्चों को दिए धर्म के संस्कार

आचार्य श्री निर्भय सागर जी महाराज ने श्री शान्तिनाथ पाठशाला के बच्चों को धर्म, संस्कार एवं नैतिक जीवन के महत्व की जानकारी दी तथा उन्हें बचपन से ही जैन संस्कृति एवं आध्यात्मिक मूल्यों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।

समाज की रही सक्रिय सहभागिता

इस अवसर पर मंदिर कमेटी के अध्यक्ष अतुल जैन, मंत्री राकेश जैन, कोषाध्यक्ष मगन चंद जैन, विजय जैन निमोरब, महेश चंद जैन, सुशील जैन, सुदीप जैन, अरुण जैन, सतेंद्र जैन, नीरज जैन, मनोज जैन, संजय जैन, जितेश जैन, विपुल जैन, अमित जैन, सिद्धार्थ जैन, मोहित जैन, वैभव जैन, प्रशांत जैन, गौरव जैन, शुभम जैन, अभिषेक जैन, मीडिया प्रभारी राहुल जैन सहित सकल जैन समाज के अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।

धर्मसभा का प्रेरक संदेश

धर्मसभा के माध्यम से श्रद्धालुओं को णमोकार मंत्र की आध्यात्मिक महिमा, आत्मशुद्धि, संयम, सदाचार एवं धर्ममय जीवन का संदेश प्राप्त हुआ। उपस्थित श्रद्धालुओं ने आचार्यश्री के उपदेशों से प्रेरणा लेकर धर्ममार्ग पर चलने का संकल्प व्यक्त किया।

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