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माता-पिता का सम्मान ही सच्चा फादर्स डे : आचार्यश्री निर्भयसागर जी महाराज


फादर्स डे के अवसर पर आगरा के श्री पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर में भव्य भक्तामर विधान आयोजित किया गया। आचार्यश्री निर्भयसागर जी महाराज ने माता-पिता के सम्मान और सेवा को ही सच्चा फादर्स डे बताया। पढ़िए श्रीफल साथी की यह रिपोर्ट।


आगरा। वैज्ञानिक संत आचार्यश्री निर्भयसागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में फादर्स डे के अवसर पर श्री पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर, ओल्ड ईदगाह कॉलोनी में भव्य भक्तामर विधान श्रद्धा एवं भक्ति के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की।

अभिषेक एवं शांतिधारा से हुआ शुभारंभ

कार्यक्रम का शुभारंभ अभिषेक एवं शांतिधारा के साथ हुआ। शांतिधारा करने का सौभाग्य योगेश जैन, सुव्रत जैन, शुभम जैन, ऋषभचंद जैन, अमित जैन, प्रमित जैन एवं नमित जैन को प्राप्त हुआ। विधान के दौरान भक्तिमय वातावरण बना रहा।

फादर्स डे का बताया वास्तविक महत्व

अपने प्रवचन में आचार्यश्री निर्भयसागर जी महाराज ने कहा कि भारतीय संस्कृति में माता-पिता का सम्मान केवल एक दिन नहीं, बल्कि प्रतिदिन किया जाता है। जहां माता-पिता की आज्ञा का पालन, विनय और सेवा होती है, वहीं प्रतिदिन फादर्स डे और मदर्स डे मनाया जाता है।

FATHER शब्द की विशेष व्याख्या

आचार्यश्री ने FATHER शब्द की व्याख्या करते हुए बताया कि पिता परिवार की मजबूत नींव (Foundation), स्नेह (Affection), विश्वास (Trust), ईमानदारी (Honesty), प्रोत्साहन (Encouragement) और जिम्मेदारी (Responsibility) का प्रतीक होते हैं। उन्होंने कहा कि पिता का जीवन आदर्श और परोपकार की भावना से युक्त होना चाहिए।

संस्कारवान संतान बनने की प्रेरणा

प्रवचन के दौरान आचार्यश्री ने पुत्र और बेटे के गुणों का उल्लेख करते हुए कहा कि जो संतान अपने कुल, परिवार और संस्कारों की रक्षा करती है, वही सच्चा पुत्र कहलाती है। उन्होंने परिवार की प्रतिष्ठा बढ़ाने और माता-पिता के सम्मान को जीवन का आधार बनाने की प्रेरणा दी।

श्रद्धालुओं की रही उपस्थिति

कार्यक्रम में अध्यक्ष ऋषभचंद जैन, मंत्री अतुल जैन, अजय जैन, सचिन जैन, अशोक जैन, राजकुमार जैन, अनिल जैन, अजीत जैन, सनी जैन, चन्द्रदीप जैन, पंकज जैन, हेमंत जैन, दीपक कपिल, आशीष जैन, विनीत जैन और नितिन जैन सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

धर्म और संस्कारों का मिला संदेश

भक्तामर विधान एवं आचार्यश्री के प्रेरक प्रवचनों के माध्यम से उपस्थित समाजजनों को माता-पिता के प्रति सम्मान, सेवा, विनय एवं पारिवारिक मूल्यों को जीवन में अपनाने का संदेश प्राप्त हुआ। कार्यक्रम श्रद्धा, भक्ति और संस्कारों के वातावरण में संपन्न हुआ।

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