अंबाह के श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन बड़े मंदिर में आयोजित धर्म संस्कार शिविर में बच्चों को जल अभिषेक एवं द्रव्य पूजा की विधि सिखाई गई। विद्वानों ने पूजा के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बच्चों को धार्मिक संस्कारों से जोड़ने का संदेश दिया। अंबाह से पढ़िए, अजय जैन की यह खबर
अंबाह। विनम्र एकेडमी द्वारा संचालित धर्म संस्कार शिविर के अंतर्गत रविवार सुबह श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन बड़े मंदिर में विशेष पूजन प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। लगातार तीसरे रविवार आयोजित इस शिविर में बच्चों ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ भाग लिया तथा जैन धर्म की मूल पूजन विधियों को सीखा।
बच्चों को सिखाई गई पूजन की विधि
शिविर में बाहर से पधारे विद्वान नमन जैन एवं स्थानीय प्रशिक्षक राजुल जैन ने बच्चों को भगवान श्री शांतिनाथ के समक्ष जल अभिषेक और द्रव्य पूजा की संपूर्ण विधि सिखाई। बच्चों को केवल प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि उसके पीछे छिपे आध्यात्मिक महत्व की भी जानकारी दी गई।
जल अभिषेक का बताया महत्व
विद्वान नमन जैन ने बच्चों को बताया कि जल अभिषेक आत्मशुद्धि, मन की निर्मलता और पापकर्मों के क्षय का प्रतीक माना जाता है। उन्होंने कहा कि विधिपूर्वक अभिषेक करने से मन में शांति आती है, सकारात्मक सोच विकसित होती है और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है।
द्रव्य पूजा से बढ़ती है भक्ति भावना
राजुल जैन ने द्रव्य पूजा का महत्व बताते हुए कहा कि भगवान के प्रति श्रद्धा और समर्पण भाव से की गई पूजा व्यक्ति के जीवन में अनुशासन, सदाचार और नैतिक मूल्यों को मजबूत करती है। साथ ही यह व्यक्ति को अहंकार से दूर रखकर आत्मविकास की दिशा में आगे बढ़ाती है।
बच्चों ने बड़े उत्साह से किया अभ्यास
जैसे ही बच्चों ने कतारबद्ध होकर भगवान के समक्ष जल अभिषेक प्रारंभ किया, पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से भर गया। बच्चों ने पूरे अनुशासन और श्रद्धा के साथ अभिषेक किया तथा द्रव्य पूजा की विधि का अभ्यास भी किया। इससे उन्हें पूजा की संपूर्ण प्रक्रिया का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त हुआ।
धर्म के साथ संस्कारों की भी शिक्षा
शिविर में बच्चों और युवाओं को जैन धर्म के मूल सिद्धांतों जैसे अहिंसा, सत्य, संयम और आत्मशुद्धि के महत्व से भी परिचित कराया गया। विद्वानों ने कहा कि यदि बचपन से ही अच्छे धार्मिक संस्कार दिए जाएं तो आने वाली पीढ़ी सुसंस्कारित और आदर्श बन सकती है।
विश्व शांति और जनकल्याण की कामना
इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने भगवान श्री शांतिनाथ की आराधना कर विश्व शांति, समाज के कल्याण और सुख-समृद्धि की मंगलकामना की। विद्वानों ने बताया कि नियमित पूजन और आराधना से आत्मा की शुद्धि होती है तथा जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं
बच्चों के लिए स्वल्पाहार की व्यवस्था
कार्यक्रम के बाद मंदिर परिसर के बाहर चंदनबाला महिला मंडल द्वारा बच्चों को स्वल्पाहार वितरित किया गया। इससे बच्चों में विशेष उत्साह देखने को मिला और सभी ने आनंदपूर्वक प्रसाद ग्रहण किया।
शांतिपाठ के साथ हुआ समापन
कार्यक्रम का समापन शांतिपाठ के साथ हुआ। आयोजकों ने बताया कि धर्म संस्कार शिविर का उद्देश्य नई पीढ़ी को धर्म, संस्कृति और नैतिक मूल्यों से जोड़ना है, ताकि वे संस्कारवान और आदर्श जीवन की ओर आगे बढ़ सकें।













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