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नौगामा में शुरू हुआ श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर, धर्म और संस्कारों की गूंज से भक्तिमय हुआ माहौल आर्यिका श्री सिद्धश्री माताजी ससंघ के सान्निध्य में 14 मई तक चलेंगे विविध धार्मिक एवं संस्कारमूलक प्रशिक्षण वर्ग


नौगामा (बांसवाड़ा) में श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर का शुभारंभ हुआ। आर्यिका श्री सिद्धश्री माताजी ससंघ के सान्निध्य में आयोजित शिविर में बच्चों, युवाओं और वरिष्ठजनों को धार्मिक शिक्षा, स्वाध्याय और संस्कारों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।


नौगामा (बांसवाड़ा)। श्री दिगंबर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर के तत्वावधान में तथा परम पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज, आचार्य श्री समयसागर जी महाराज एवं परम पूज्य मुनि श्री सुधासागर जी महाराज के आशीर्वाद से श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर का शुभारंभ बड़े ही श्रद्धा और उत्साह के साथ किया गया।

यह शिविर 7 मई से 14 मई तक परम पूज्या आर्यिका श्री सिद्धश्री माताजी ससंघ के पावन सान्निध्य में आयोजित हो रहा है, जिसमें समाज के लोग बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं।

शांतिधारा और अभिषेक के साथ हुई शुरुआत

शिविर के प्रथम दिन प्रातःकाल श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में विशेष शांतिधारा एवं अभिषेक का आयोजन हुआ। इसके बाद चित्र अनावरण, दीप प्रज्ज्वलन, जिनवाणी स्थापना और मंगल कलश स्थापना जैसे धार्मिक कार्यक्रम संपन्न हुए। समाज के अनेक श्रद्धालुओं ने इसमें सहभागिता निभाई।

इस अवसर पर कमेटी अध्यक्ष विपुल पंचोली सहित बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी बंधु उपस्थित रहे।

विद्वानों का हुआ सम्मान

श्री दिगंबर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर से पधारे विद्वतश्री सिद्धार्थ जैन शास्त्री (रहली) एवं कुशाल जैन शास्त्री (टोंक) का समाज की ओर से सम्मान किया गया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने उनका आत्मीय स्वागत किया।

माताजी ने दिया स्वाध्याय का संदेश

आर्यिका श्री सिद्धश्री माताजी ने अपने मंगल आशीर्वचन में कहा कि ऐसे शिक्षण शिविर समय-समय पर आयोजित होते रहने चाहिए। इससे समाज के लोग, विशेषकर नई पीढ़ी, धर्म से जुड़ती है और पंचम काल में स्वाध्याय एवं शुभोपयोग की क्रियाओं के माध्यम से आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त करती है।

बच्चों से लेकर बड़ों तक के लिए विशेष कक्षाएं

शिविर में सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए अलग-अलग धार्मिक और संस्कारमूलक कक्षाओं का आयोजन किया जा रहा है।

प्रतिदिन प्रातः 8:30 बजे पूजन प्रशिक्षण दिया जाएगा। दोपहर 2 बजे से 3 बजे तक द्रव्य संग्रह की कक्षा, दोपहर 3 बजे से 4 बजे तक वरिष्ठजनों के लिए चौबीस ठाणा तथा बच्चों के लिए भक्तामर एवं बालबोध भाग-2 की कक्षाएं आयोजित होंगी।

इसके अलावा शाम 4 बजे से 4:30 बजे तक संस्कृत व्याकरण की कक्षा, शाम 6:30 बजे से 7:30 बजे तक बच्चों के लिए विशेष कक्षा तथा रात 7:30 बजे से 9 बजे तक बड़े लोगों के लिए श्री करणानुयोग दीपक भाग-3 एवं श्री तत्त्वार्थ सूत्र की कक्षाएं संचालित की जाएंगी।

समाज में दिख रहा उत्साह

शिविर को लेकर समाज के लोगों में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। बच्चे, युवा, महिलाएं और वरिष्ठजन नियमित रूप से कक्षाओं में भाग लेकर धर्मज्ञान अर्जित कर रहे हैं और अपने जीवन को संस्कारित बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

संचालन और जानकारी

कार्यक्रम का संचालन भरत पंचोली ने किया। शिविर की जानकारी जैन समाज प्रवक्ता सुरेशचंद्र गांधी द्वारा प्रदान की गई।

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