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बचपन के संस्कार ही गढ़ते हैं श्रेष्ठ चरित्र: भक्तामर महातीर्थ में 5 दिवसीय धार्मिक संस्कार शिविर का भव्य समापन’


एक चरित्रवान व्यक्ति ही समाज में अपनी प्रतिष्ठा स्थापित कर सर्वाेच्च सम्मान पाता है। इसलिए बचपन से ही धर्म गुरुओं का सानिध्य पाकर संस्कारों का बीजारोपण करना अनिवार्य है। यह प्रेरणादायी विचार आचार्य श्री विश्वरत्न सागर सूरीश्वरजी ने भक्तामर महातीर्थ में आयोजित पांच दिवसीय धार्मिक संस्कार शिविर के समापन अवसर पर व्यक्त किए। नागदा से पढ़िए, यह रिपोर्ट….


नागदा (धार)। बचपन में ग्रहण किए गए धर्म के संस्कार ही आगे चलकर व्यक्ति के चरित्र का निर्माण करते हैं। एक चरित्रवान व्यक्ति ही समाज में अपनी प्रतिष्ठा स्थापित कर सर्वाेच्च सम्मान पाता है। इसलिए बचपन से ही धर्म गुरुओं का सानिध्य पाकर संस्कारों का बीजारोपण करना अनिवार्य है। यह प्रेरणादायी विचार आचार्य श्री विश्वरत्न सागर सूरीश्वरजी ने भक्तामर महातीर्थ में आयोजित पांच दिवसीय धार्मिक संस्कार शिविर के समापन अवसर पर व्यक्त किए। उन्होंने उपस्थित बच्चों और युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि आप में से ही कोई युवा आगे चलकर यहां से प्राप्त संस्कारों के बल पर धर्म के क्षेत्र का बड़ा योद्धा बनेगा और अपना नाम उज्जवल करेगा। इतनी बड़ी संख्या में युवाओं का इस शिविर से जुड़ना और धर्म आराधना करना अत्यंत अनुमोदनीय है। इस भव्य समापन समारोह के अवसर पर मालवा महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष मेहता, राष्ट्रीय महासचिव वीरेंद्र जैन, राष्ट्रीय पदाधिकारी राजेंद्र बोकडिया, सुधीर जैन एवं भूषण शाह अतिथि के रूप में मंचासीन रहे।

कहानियों के माध्यम से सीखा धर्म का मर्म

शिविर के दौरान भक्तामर महातीर्थ प्रेरक आचार्य जितरत्न सागर सूरीश्वरजी मसा एवं तपोनिष्ठ चंद्ररत्न सागरजी मसा ने भी उपस्थित युवाओं को धार्मिक प्रसंगों पर आधारित प्रेरक कहानियों के माध्यम से जीवन की गहरी समझाइश दी। भीषण गर्मी के दिनों में भी बच्चों का उत्साह कम नहीं हुआ और उन्होंने गुरु भगवंतों से धर्म के मर्म को आत्मसात किया।

युवाओं की प्रस्तुति ने मोहा मन

समापन समारोह में शिविरार्थी बच्चों और युवाओं ने इन पांच दिनों में प्राप्त किए गए ज्ञान का अतिथियों के सामने अत्यंत सुंदर तरीके से प्रस्तुतीकरण किया। बच्चों की धर्म के प्रति इस गहरी रुचि और प्रतिभा को देखकर उपस्थित सभी अतिथियों और समाजजनों ने उनकी खुलकर सराहना की।

सहयोगियों और प्रतिभावानों का हुआ बहुमान

शिविर को सफल बनाने में अपना अमूल्य सहयोग प्रदान करने वाले समाजसेवियों राजेश नलखेड़ा, आशीष चोरड़िया और ललित भंडारी का शॉल और श्रीफल भेंटकर भावभीना बहुमान किया गया। इसके साथ ही, शिविर में सम्मिलित हुए सभी उत्साही युवाओं को केसरचंद, गंभीरचंद, पत्रकार परिवार राजगढ़ की ओर से पुरस्कृत कर सम्मानित किया गया।

अतिथियों के प्रेरक विचार

राष्ट्रीय अध्यक्ष, मालवा महासंघ संतोष मेहता ने कहा कि ऐसे शिविरों के आयोजन से संघ और समाज में धर्म की जागृति आती है और समाज एक नई, सकारात्मक दिशा की ओर अग्रसर होता है। राष्ट्रीय महासचिव वीरेंद्र जैन ने कहा कि युवाओं को धर्म के प्रति जोड़ने का जो आचार्य श्री का मुख्य उद्देश्य है, ऐसे शिविरों के माध्यम से समाज में धर्म के प्रति एक नई क्रांति आएगी।

जड़ मजबूत तो फल मीठा

राष्ट्रीय पदाधिकारी राजेन्द्र बोकडिया ने कहा कि जिस प्रकार किसी वृक्ष को फलदार और सुदृढ़ बनाने के लिए उसकी जड़ को मजबूत करना पड़ता है, तभी मीठे फल की प्राप्ति होती है, ठीक उसी प्रकार पूज्य आचार्य श्री ने इन युवाओं की ‘संस्कार रूपी जड़’ को मजबूती प्रदान की है, जिससे वे भविष्य में समाज के श्रेष्ठ फल के रूप में विकसित होंगे।

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