अजमेर में आयोजित पुरस्कार अलंकरण समारोह में नगर के युवा मनीषी एवं बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी डॉ. सुनील जैन संचय को उनके उत्कृष्ट साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक अवदान के लिए प्रतिष्ठित ‘वाक्केशरी सम्मान’ से दिया गया। ललितपुर से पढ़िए, यह खबर…
ललितपुर। आचार्य श्री विनिश्चयसागर जी महाराज के दशम आचार्य पदारोहण दिवस के पावन अवसर पर राजस्थान के सावर, अजमेर में आयोजित पुरस्कार अलंकरण समारोह में नगर के युवा मनीषी एवं बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी डॉ. सुनील जैन संचय को उनके उत्कृष्ट साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक अवदान के लिए प्रतिष्ठित ‘वाक्केशरी सम्मान’ से दिया गया। यह गरिमामयी समारोह मुनि श्री प्रज्ञानसागर जी महाराज एवं मुनि श्री प्रसिद्धसागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में संपन्न हुआ। समारोह में डॉ. संचय को प्रशस्ति-पत्र, स्मृति-चिह्न, शाल, श्रीफल, अंगवस्त्र एवं पुरस्कार राशि भेंट कर सम्मानपूर्वक अलंकृत किया गया। इस अवसर पर मुनि श्री प्रज्ञानसागर जी महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि सम्मान व्यक्ति का नहीं, उसके व्यक्तित्व एवं गुणों का होता है। डॉ. सुनील संचय के भीतर विद्यमान साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गुणों का ही आज सम्मान किया गया है।
डॉ. सुनील जैन संचय लंबे समय से दर्शन, संस्कृति, साहित्य एवं समाज चेतना के विविध आयामों पर सतत लेखन एवं वैचारिक सेवा में सक्रिय हैं। उनकी शोधपरक दृष्टि, साहित्य साधना एवं सांस्कृतिक प्रतिबद्धता को विशेष सम्मान प्राप्त है। प्रभावी , ओजस्वी वक्ता, कुशल शिक्षाविद के रूप में जाने जाते हैं। जनपद की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं धार्मिक संस्थाओं, विद्वानों, गणमान्य नागरिकों एवं मित्रों ने डॉ. संचय को शुभकामनाएँ प्रेषित करते हुए उनके उज्ज्वल साहित्यिक भविष्य की मंगलकामना की।













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