21 वीं सदी की भौतिकवादी चकाचौंध में जहां करोड़पति, अरबपति अपना धन का वैभव बताते हैं। शादी, सालगिरह, जन्मदिन विदेश में मनाते हैं किंतु कुछ पुण्यशाली सक्षम ऐसे युवा भी होते हैं जो अपने द्रव्य का उपयोग अपनी विवाह की सालगिरह गुरु सानिध्य में मनाते हैं। जयपुर से पढ़िए, यह खबर…
जयपुर। 21 वीं सदी की भौतिकवादी चकाचौंध में जहां करोड़पति, अरबपति अपना धन का वैभव बताते हैं। शादी, सालगिरह, जन्मदिन विदेश में मनाते हैं किंतु कुछ पुण्यशाली सक्षम ऐसे युवा भी होते हैं जो अपने द्रव्य का उपयोग अपनी विवाह की सालगिरह गुरु सानिध्य में मनाते हैं। भगवान का पूजन और पंचामृत अभिषेक, धार्मिक अनुष्ठान आराध्य गुरु आचार्य श्री वर्धमान सागर जी सान्निध्य में करते हैं। कमलेश देवी सन्मति चंवरिया निवाई ने अपने वैवाहिक वर्षगांठ के उपलक्ष्य आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ सानिध्य में बड़ के बालाजी जयपुर में 24 मई को श्री चन्द्रप्रभ भगवान के अभिषेक पूजन के बाद आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का पूजन किया।
सन्मति कुमार कमलेश देवी जैन ने पुत्रों पुत्रवधुओं सुकमाल, महिपाल, मोहित, नीलम, शालू, आयुषी, ऋत्वी , निरुपम, जिन्नाश, धैर्यांश जैन चवरिया परिवार, परिजनों विमल जैन झीलाय, गोपाल कठमाणा, शम्भू कठमाणा ने अष्ट द्रव्यों, जल, चंदन, अक्षत विभिन्न पुष्पों ,अनेक प्रकार के नैवेद्य,दीप, धूप विभिन्न फलों ,सूखे मेवे अर्घ्य समर्पित कर अनुष्ठान किया। 36 मूलगुण धारी आचार्य और श्री जी का पूजन 36 द्रव्यों से भक्ति नृत्य पूर्वक किया। पूजन के मंत्रोच्चार आर्यिका श्री महायश मति ने किए।













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