श्री पार्श्वनाथ ब्रम्हचर्य जैन गुरुकुल वेरूळ (एलोरा) में 21 अप्रैल को अनोखे आध्यात्मिक तरीके से चिरंजीव भाविक प्रशांत गडेकर का 12वां जन्म दिवस गुरुकुल के छात्रों के साथ जैन प्रथा परंपरा के साथ मनाया गया। वेरूल से पढ़िए, यह खबर…
वेरूल। श्री पार्श्वनाथ ब्रम्हचर्य जैन गुरुकुल वेरूळ (एलोरा) में 21 अप्रैल को अनोखे आध्यात्मिक तरीके से चिरंजीव भाविक प्रशांत गडेकर का 12वां जन्म दिवस गुरुकुल के छात्रों के साथ जैन प्रथा परंपरा के साथ मनाया गया। सुबह अभिषेक पूजन कर गुरुदेव समंतभद्र महाराज, गुरुदेव आर्यनंदीजी महाराज, आचार्य भगवन विद्यासागरजी महाराज , आचार्य समयसागरजी महाराज, पट्टाचार्य विशुद्ध सागर जी के परम प्रभावक शिष्य मुनिश्री सुप्रभसागरजी के प्रतिमा के दर्शन कर प्रत्यक्ष मुनिश्री नियमसागर जी महाराज, मुनिश्री सुपार्श्वसागर जी महाराज जी के दर्शन कर भाविक ने आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर गाय को चारा खिलाया गया।
केक कटिंग त्याग तरबूज काटा
शाम के भोजन के साथ मिष्ठान फ्रूट सैलेट देकर बच्चों के साथ केक न कट करते हुए भोजन पूर्व तरबूज कटकर जन्म दिवस मनाया गया। न्यूचरल फ्रूट बच्चों को दिए गए। पूरे पारंपरिक तरीके से। बाल ब्रह्मचारी मनीष भैयाजी के साथ शिक्षक सूरज मेहेत्रे, आशय आहले, मार्मिक गोरे ने भाविक के माथे पर तिलक लगाकर मोतियां ेकी माला पहनाकर आशीर्वचन दिए। सभी गुरुकुल के शिक्षक, कर्मचारी समेत बच्चों ने जन्म दिवस की शुभ कामनाएं दी। आचार्य श्री विद्यासागर एवं् आचार्य श्री समयसागर जी के विचारकों फास्ट फूड के त्याग के संकल्प को संकल्पित किया गया। गुरुकुल के सभी बच्चों ने भोजन के पूर्व नवाकर मंत्र बोलकर शांत भाव से भोजन ग्रहण किया। इस उपलक्ष्य में भाविक के पिताजी गुरुभक्त प्रशांत गडेकर ने बच्चों को नई प्रेरणा दी।
प्रशांत गड़ेकर का किया सम्मान
संकल्पना की अनुमोदना देकर मोती की माला तिलक लगाकर प्रशांत गडेकर सम्मान किया गया तो उनके जीवन में गुरुकुल के अनंत उपकार हैं, गुरुकुल मेरी मां हैं इसे भाव व्यक्त किए। 12 साल पुरे होने पर चीकू, अंगूर, पपीता, फ्रूट सलेट, तरबूज, खरबूज सभी 12-12 किलो देकर फास्ट फूड को जीवन में त्यागने का भाव अपनाने का संदेश दिया गया। विद्यासागरजी के शिष्य मुनिश्री नियमसागरजी गुरूदेव ने भाविक के चित्र पर रेखांकित कर दिया विशेष आशीर्वाद।













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