कष्ट दुःख असाता को भी समता भाव पूर्वक सहन करने से साता वेदनी कर्म का ही वंद होता है। ऐसा नहीं है कि आप दुख दारुणय कष्टों को समता भाव पूर्वक सहते जा रहे हैं फिर भी कष्ट ही आए समता से आगे चलकर साता का ही उदय आएगा। यह उद्गार मुनि श्री सुधासागरजी महाराज ने व्यक्त किए। वे जिज्ञासा समाधान में बोल रहे थे। मुंगावली से पढ़िए, यह खबर…
मुंगावली। कष्ट दुःख असाता को भी समता भाव पूर्वक सहन करने से साता वेदनी कर्म का ही वंद होता है। ऐसा नहीं है कि आप दुख दारुणय कष्टों को समता भाव पूर्वक सहते जा रहे हैं फिर भी कष्ट ही आए समता से आगे चलकर साता का ही उदय आएगा। यह उद्गार मुनि श्री सुधासागरजी महाराज ने व्यक्त किए। वे जिज्ञासा समाधान में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि दुःख का यदि हम दुःख ना माने तो सुख जरूर आएगा। ये प्रकृति का नियम है कि यदि कष्ट दुःख आने पर अपना आपा खो दे तो दुःख ही बढ़ेगा सुख नहीं मिल सकता। सुख पाने के लिए तो दुःख को भी हंसी-हंसी में झेलना ही होगा। फिर देखो सुख आपके पीछे पीछे दौड़ा आएगा। मुनिश्री ने कहा कि अब आपके नगर को एक नई पहचान मिलने जा रही है। अब लोग णमोदय तीर्थ के करने आएंगे। इससे मुंगावली को एक नई पहचान मिलेगी।
मंदिर निर्माण में सहयोग करने का किया वादा
इसके पहले जैन समाज अशोक नगर अध्यक्ष राकेश कांसल के साथ अथाईखेड़ा जैन समाज ने मुनिश्री सुधासागरजी से अथाईखेड़ा गांव में नए जिनालय के निर्माण का निवेदन किया। निर्मल जैन ने कहा कि हम वर्षाें से आपके आगमन का इंतजार कर रहे हैं। जिससे मंदिर का निर्माण हो। जैन समाज के मंत्री विजय धुर्रा ने कहा कि अथाईखेड़ा वाले आज अशोक नगर की पूरी कमेटी को साथ लाए हैं। ये किशनगढ़ बिजोलिया आबा हर जगह गए। यहां खनियाधाना गोला कोट के बाद आस जगी कि आपके चरण इस ओर बढ़ सकते हैं और आज अथाईखेड़ा की उम्मीद जगी है। आपका मार्ग दर्शन और आशीर्वाद चाहिए। प्रदीप भैया भूमि का अवलोकन कर लें और भूमिका पूरी बन जाए। इस दौरान जैन समाज अध्यक्ष राकेश कांसल, महामंत्री राकेश अमरोद, कोषाध्यक्ष सुनील अखाई सहित पूरी कमेटी ने अथाईखेड़ा मंदिर निर्माण में सहयोग का निवेदन किया।
भू-दान के साथ मंदिर निर्माण का लिया संकल्प
मुनि श्री सुधासागरजी महाराज ससंघ के सान्निध्य में नगर के श्रावक श्रेष्ठी निर्मलकुमार अथाईखेडा एवं उनकी जीवन संगनी ने दो बीघा ज़मीन के साथ मंदिर निर्माण के साथ प्रभु की विशाल प्रतिमा स्थापित करने की भावना रखी तो जैन समाज के पूर्व महामंत्री गिरीश अथाईखेडा ने कहा कि हम सब मिलकर भव्य जिनालय को आकार देने के लिए कृतसंकल्पबद्ध हो रहे हैं। आपके चरण चालीस वर्ष पूर्व पड़े। अब अथाईखेड़ा पधारें पर मंदिर निर्माण का संकल्प पूरा कराएं इस दौरान अजित बरोदिया, प्रदीप तारई, शैलेंद्र श्रागर, पत्रकार अरविंद कचनार, सांसद प्रतिनिधि संजीव भारिल्य, विपिन सिंघई, शैलेंद्र दददा, हेमंत टडैया, मनीष सिंघई, रिंकेश कांसल, मुनेश विजयपुरा, मुन्ना बांझल, टिंकल जैन, पवन जैन अथाईखेड़ा उपस्थित थे।
धर्मशाला के साथ विस्तार भू-भाग व संत शाला हो
इस दौरान मुनिश्री सुधासागरजी महाराज ने कहा कि जब भी कोई नवीन योजना बनती है तो भविष्य को भी ध्यान में रखकर कार्य करना चाहिए। मंदिर निर्माण वर्षाें में कभी हो पाते हैं। ये निर्मल गिरीश बहुत पुराना भक्त है। अथाईखेड़ा परिवार मंदिर निर्माण के साथ एक अच्छी धर्मशाला व संत निवास का भी निर्माण हो तो सभी आवश्यकताओं की धीरे धीरे पूर्ति हो जाएगी। बहुत दिनों से निवेदन चल रहा है ये कार्य भी जल्दी पूरा हो। मेरी भी भावना आपके साथ शामिल हो रही है। इस दौरान उन्होंने कहा कि स्वयं का आंकलन करते रहना चाहिए तब ही आपका पुरुषार्थ सफल होगा और सफलता भी मिलती चली जाएगी। हमारे मन वचन काय की चेष्टाओ से ही तो कर्मांे का आस्त्रव होता है। इनको रोकने का नाम ही संवर कहलाता है। सांसकारिक दशा में कर्मबंधता नहीं कर्मबंध किया जाता है। जब तक कषाय को नहीं रोकेंगे तो कर्म तो बंधते ही रहेंगे। कषाय को मंद करने के लिए बाहरी वातावरण को तो रोकना ही होगा। अंदर मन वचन काय की चेष्टाओं को भी शांत करना होगा।













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