जबरी बाग नसिया क्षेत्र में भगवान महावीर स्वामी का जन्मकल्याणक महोत्सव अपार हर्षोल्लास और भक्तिभाव के साथ मनाया गया। श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर, जबरी बाग नसिया में आयोजित इस भव्य समारोह ने पूरे क्षेत्र को धर्ममयी वातावरण में सराबोर कर दिया।इंदौर से पढ़िए, हरिहरसिंह चौहान की यह खबर…
इंदौर। जबरी बाग क्षेत्र में भगवान महावीर स्वामी का जन्मकल्याणक महोत्सव अपार हर्षोल्लास और भक्तिभाव के साथ मनाया गया। श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर, जबरी बाग नसिया में आयोजित इस भव्य समारोह ने पूरे क्षेत्र को धर्ममयी वातावरण में सराबोर कर दिया।
चांदी की पालकी में निकले ‘नगर सेठ’
महावीर जयंती के पावन अवसर पर सुबह की पावन वेला में भगवान महावीर (श्रीजी) को एक भव्य और कलात्मक चांदी की पालकी में विराजित किया गया। ढोल-नगाड़ों और बैंड-बाजों की मधुर स्वर लहरियों के बीच मंदिर परिसर से भव्य शोभायात्रा का शुभारंभ हुआ। इस दौरान ‘त्रिशला नंदन वीर की, जय बोलो महावीर की’ के गगनभेदी जयकारों से वातावरण गुंजायमान हो उठा।
भक्तिमय रहा शोभायात्रा का मार्ग
यह शोभायात्रा जबरी बाग नसिया से प्रारंभ होकर छोटी ग्वालटोली, मधुमिलन चौराहा, किबे कंपाउंड, श्रद्धानंद मार्ग और संयोगितागंज जैसे प्रमुख क्षेत्रों से गुजरी। मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने भगवान की आरती उतारी और पुष्प वर्षा कर अपनी अगाध श्रद्धा प्रकट की। केसरिया ध्वज और पारंपरिक परिधानों में सजे समाजजन यात्रा की शोभा बढ़ा रहे थे। अंत में यह जुलूस पुनः नसिया जी पहुँचकर संपन्न हुआ।
विधि-विधान से हुआ अभिषेक और पूजन
शोभायात्रा के समापन के पश्चात मंदिर में धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला शुरू हुआ। हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता वीरकुमार जैन, नरेन्द्र जैन और धीरेन्द्र कासलीवाल के गरिमामय नेतृत्व में भगवान का मंगल कलश अभिषेक किया गया। उपस्थित श्रावकों ने पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा-अर्चना की। मंत्रोच्चार के बीच हुए इस अभिषेक ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया।
समाज की रही सक्रिय सहभागिता
इस मांगलिक अवसर पर समाज के वरिष्ठजन और पदाधिकारी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे, जिनमें महेन्द्र कुमार जैन, राजेश जैन, दीपक कुमार जैन, राजीव कुमार जैन, धर्मेन्द्र कुमार जैन, अमित जैन और उज्जवल जैन शामिल थे। महोत्सव की खास बात यह रही कि इसमें बच्चों से लेकर बुजुर्गों और महिलाओं तक ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। बच्चों में भगवान महावीर के सिद्धांतों के प्रति विशेष उत्साह देखा गया।
पूरा आयोजन एकता और वात्सल्य भाव का प्रतीक बना। अंत में सभी ने भगवान महावीर के ‘जियो और जीने दो’ के संदेश को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लिया। धूमधाम से मनाए गए इस उत्सव ने इंदौर के सांस्कृतिक और धार्मिक वैभव को एक बार फिर प्रदर्शित किया।













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