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साधना नगर जिनालय बना संस्कारों की विशाल पाठशाला, 8 दिवसीय शिविर का समापन : 550 बच्चों ने लिया संस्कारों का प्रशिक्षण, प्रतिभाओं को मिला सम्मान


इंदौर के साधना नगर जिनालय में 8 दिवसीय जैनत्व बाल संस्कार शिविर का भव्य समापन हुआ। 550 बच्चों ने संस्कार, शिक्षा और नैतिक मूल्यों का प्रशिक्षण लिया। प्रतिभाशाली बच्चों को सम्मानित किया गया। आयोजन में समाज का भरपूर सहयोग रहा। पढ़िए इंदौर से प्रीतम लखवाल की यह रिपोर्ट….


इंदौर के साधना नगर स्थित श्री दिगम्बर जैन कुन्दकुन्द परमागम ट्रस्ट द्वारा आयोजित 8 दिवसीय जैनत्व बाल संस्कार शिविर का समापन भव्य रूप से हुआ। पिछले 25 वर्षों से लगातार चल रहा यह शिविर इस वर्ष 26वें वर्ष में प्रवेश कर गया, जो अपने आप में एक मिसाल है।

भव्य समापन और जुलूस

रविवार 29 मार्च 2026 को श्री चंदाप्रभु मांगलिक भवन में समापन समारोह आयोजित हुआ। इससे पहले बच्चों का एक विशाल जुलूस प्रमुख मार्गों से निकाला गया, जिसने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय माहौल में रंग दिया।

550 बच्चों ने लिया संस्कारों का प्रशिक्षण

इस शिविर में करीब 550 बच्चों ने भाग लिया, जहां उन्हें जैन धर्म, नैतिक मूल्य और चरित्र निर्माण की शिक्षा दी गई। रोजाना पूजन, नाश्ता, सामूहिक कक्षाएं और अलग-अलग विषयों की शिक्षा दी जाती थी।

प्रतिभाओं का हुआ सम्मान

शिविर के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बच्चों को पुरस्कार और प्रमाण-पत्र दिए गए। वहीं 15 विद्यार्थियों को “शिविर प्रतिभा सम्मान” से नवाजा गया। समापन से पहले बच्चों की परीक्षाएं भी आयोजित की गई थीं।

विद्वानों का मिला मार्गदर्शन

शिविर में पं. रीतेशजी शास्त्री (सनावद) और पं. अशोकजी शास्त्री (राधौगढ़) की अहम भूमिका रही। साथ ही टोडरमल स्मारक विद्यालय, बांसवाड़ा, कोटा और आत्मार्थी विद्यालय (दिल्ली) के विद्वानों का विशेष सहयोग मिला।

निःशुल्क सेवा बनी पहचान

ट्रस्ट के अध्यक्ष विजय बड़जात्या और महामंत्री सुशील काला ने बताया कि यह शिविर पूरी तरह निःशुल्क आयोजित किया जाता है। बच्चों के लिए बस सुविधा, सामग्री और भोजन की व्यवस्था भी ट्रस्ट द्वारा ही की गई।

समाज का सराहनीय सहयोग

इस आयोजन में समाजजन, श्रेष्ठीजन, महिला मंडल और युवा संगठनों का भरपूर सहयोग रहा। भोजन, कक्षा संचालन, यातायात और प्रचार-प्रसार में सभी का योगदान सराहनीय रहा।

अगले वर्ष फिर जुड़ने का आह्वान

अंत में अध्यक्ष विजय बड़जात्या ने सभी बच्चों को अगले वर्ष भी इसी उत्साह के साथ शिविर में भाग लेने का निमंत्रण दिया।

संस्कारों से सजे बच्चे ही समाज का उज्ज्वल भविष्य बनाते हैं…

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