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मुनि श्री विमलसागरजी एवं मुनि श्री अनंतसागरजी की मंगल अगवानी : वर्षों बाद हुआ पंच ऋषिराजों का महा मिलन 


आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के शिष्य तथा आचार्य श्री समयसागर जी के आज्ञानुवर्ती मुनि श्री विमलसागरजी महाराज एवं मुनि श्री अनंतसागरजी महाराज का रंगपंचमी के पावन अवसर पर नगर में मंगल आगमन हुआ। विदिशा से पढ़िए, यह खबर…


विदिशा। आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के शिष्य तथा आचार्य श्री समयसागर जी के आज्ञानुवर्ती मुनि श्री विमलसागरजी महाराज एवं मुनि श्री अनंतसागरजी महाराज का रंगपंचमी के पावन अवसर पर नगर में मंगल आगमन हुआ। उनकी भव्य मंगल अगवानी मुनि श्री संभवसागर जी महाराज, मुनि श्री निस्सीमसागर जी महाराज एवं मुनि श्री संस्कारसागरजी महाराज के संघ सानिध्य में श्री सकल दिगम्बर जैन समाज द्वारा श्री धर्मनाथ दिगंबर जैन मंदिर बंटीनगर से की गई। वर्षों बाद पंच ऋषिराजों का मिलन देखकर उपस्थित जनसमुदाय भावविभोर हो गया और अनेक श्रद्धालुओं की आँखें नम हो गईं। पूरे वातावरण में आचार्य गुरुदेव और पंच ऋषिराजों की जय-जयकार से धर्ममय माहौल बन गया।यहाँ से पंच ऋषिराज एक साथ विहार करते हुए खरी फाटक मार्ग से माधवगंज स्थित श्री शांतिनाथ जिनालय पहुँचे। धर्मसभा में श्री सकल दिगम्बर जैन समाज समिति, श्री शीतलविहार न्यास ट्रस्ट, श्री पंचकल्याणक समारोह समिति एवं श्री शांतिनाथ जिनालय समिति द्वारा पंच ऋषिराजों को आगामी पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव में विराजमान रहने का विनम्र अनुरोध करते हुए श्रीफल अर्पित किया गया।

संतों का मिलन बहुत कठिनाई से हो पाता है

इस अवसर पर मुनि श्री संभवसागर जी महाराज ने कहा कि मुनि श्री विमलसागर जी महाराज गंजबासौदा से आठ उपवास के साथ पंचकल्याणक कराकर विहार करते हुए विदिशा पधारे हैं। उन्होंने कहा कि बर्रों वाले बाबा भगवान आदिनाथ को नए मंदिर में विराजमान करने तथा नवीन जिनबिंबों के पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव को पंच ऋषिराजों के सानिध्य में कराने की मंगल भावना है। उन्होंने कहा कि आप लोग तो वाहन से तुरंत एक स्थान से दूसरे स्थान पहुँच जाते हैं, लेकिन हम संतों का मिलन बहुत कठिनाई से हो पाता है। हमें अत्यंत प्रसन्नता है कि हम सभी आचार्य गुरुदेव की शिक्षा में एक ही कक्षा के विद्यार्थी रहे हैं और साथ-साथ अनेक ग्रंथों का अध्ययन किया है।

समाज को मार्गदर्शन दिया

वर्ष 2008 में जब गुरुदेव विदिशा आए थे, तब भी हम सभी साथ थे।उन्होंने बताया कि हाल ही में फाल्गुन की अष्टाह्निका में गंजबासौदा में पंचकल्याणक में आठों दिन मुनि श्री विमलसागर महाराज का उपवास रहा और ऐसे में तीनों समय का प्रवचन एवं समाज को मार्गदर्शन भी देते रहे। ऐसे तपस्वी संत को मैं प्रणाम करता हूँ। हम सभी पंच ऋषिराज मिलकर 11 मार्च से प्रारंभ होने वाले बर्रों वाले बाबा के पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव को विश्व शांति महायज्ञ की भावना के साथ संपन्न करें, ऐसी मेरी और समाज की भावना है।

विदिशा में भी चारित्र की सुगंधि फैल गई

इस अवसर पर मुनि श्री विमलसागर महाराज ने कहा कि मुनि संभवसागर महाराज ने गंजबासौदा में चातुर्मास किया था, वहाँ उनके चारित्र की सुगंधि फैली हुई थी और पिछले चार महीनों में पूरे विदिशा में भी उनके चारित्र की सुगंधि फैल गई है। उन्होंने ऐसे कार्य संभव कर दिखाए जो पहले असंभव प्रतीत हो रहे थे, जिससे वे पूरे विदिशा के प्रिय पात्र बन गए। मुनि श्री ने कहा कि बसंत पंचमी तो हमने अनेक बार मनाई, लेकिन इस बार की ऋषि पंचमी स्वयं चलकर रंगपंचमी पर विदिशा आ गई।

श्रीजी की भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी

पंच कल्याणक समारोह की जानकारी देते हुए श्री सकल दिगम्बर जैन समाज समिति के प्रवक्ता अविनाश जैन ‘विद्यावाणी’ ने बताया कि 11 से 16 मार्च तक जैन महाविद्यालय परिसर में शीतलधाम के बर्रों वाले बाबा भगवान आदिनाथ जिनालय के जिनबिंबों का पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव किया जा रहा है।कार्यक्रम की शुरुआत 11 मार्च प्रातः 6:30 बजे श्री शांतिनाथ जिनालय, स्टेशन जैन मंदिर से श्रीजी की भव्य शोभायात्रा, मुनिसंघ के सानिध्य में घटयात्रा के साथ प्रारंभ होगी,जो जैन महाविद्यालय परिसर में निर्मित अयोध्या नगरी के विशाल पांडाल में पहुँचेगी। वहाँ ध्वजारोहण, मंडप उद्घाटन, मंडप शुद्धि, वेदी शुद्धि, श्रीजी का अभिषेक एवं शांति धारा के साथ छह दिवसीय श्री 1008 जिनबिंब पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महा महोत्सव का शुभारम्भ हो जाऐगा,यह आयोजन 16 मार्च (रविवार) तक निरंतर चलेगा। प्रतिदिन प्रातः 6 बजेअभिषेक एवं विश्व शांति की मंगल भावना के साथ शांति धारा होगी तथा पूजन के समापन पर हवन किया जाएगा।

प्रतिदिन नित्य नियम पूजन होगा

भगवान शीतलनाथ स्वामी के गर्भ कल्याणक दिवस से प्रारम्भ इस महा महोत्सव में प्रतिदिन नित्य नियम पूजन, आचार्य गुरुदेव की पूजन, पंचकल्याणक की मांगलिक क्रियाएँ, दोपहर 12 बजे यागमंडल विधान तथा पंचकल्याणक की पूजन तथा सायं 4 बजे मुनिश्री का प्रवचन होगा। रात्रि 7 बजे से मंगल आरती और 7:45 बजे इंद्रसभा का आयोजन किया जाएगा, प्रथम दिवस माता के 16 स्वप्न एवं उनके फलादेश को दिखाया जाएगा।

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