तीर्थंकर महावीर इनोवेशन फाउंडेशन-टीएमआईएफ की निदेशक प्रो. मंजुला जैन की लीडरशिप में कैंपस-टू-इंपैक्ट थीम पर प्रमुख नवाचार एवं उद्योग विशेषज्ञों ने विचार साझा किए। मुरादाबाद से पढ़िए, प्रो. श्यामसुंदर भाटिया की यह खबर…
मुरादाबाद। इंडिया एआई इंपैक्ट समिट में तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद ने अपनी अविस्मरणीय भूमिका निभाई। कैंपस टू इंपैक्ट थीम के तहत प्रमुख नवाचार एवं उद्योग विशेषज्ञों ने पैनल चर्चा में अकादमिक विचारों को वर्चुअली दुनिया में एआई समाधानों को बदलने की अपनी प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। सुषमा स्वराज भवन के नालंदा हॉल में हुए इस सारगर्भित डिस्कशन में एंबेसी ऑफ इजराइल की प्रतिनिधि माया शरमन, एफआईटीटी- आईआईटी, दिल्ली के एमडी- डॉ. निखिल अग्रवाल, जेनोवा बायोफार्मास्यूटिकल्स की इंडिपेंडेंट डायरेक्टर डॉ. कविता सिंह, इकोसिस्टम एवम् इनोवेशन स्ट्रेटेजी लीडर उत्कर्ष मिश्रा सरीखी हस्तियों की उल्लेखनीय मौजूदगी रही। तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद की डीन एकेडमिक्स एवं तीर्थंकर महावीर इनोवेशन फाउंडेशन-टीएमआईएफ की निदेशक प्रो. मंजुला जैन ने इस चर्चा के संचालन की जिम्मेदारी का निर्वाह किया। विभिन्न सेक्टरों की इन हस्तियों ने अपने-अपने क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की खामियों और खूबियों का मंथन किया। इस सत्र में टीएमयू के तीन स्टार्टअप्स फाउंडर्स ने अपनी-अपनी खूबियां भी बताईं। टीएमयू की ओर से बतौर समन्वयक तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी टीएमआईएफ के इन्क्यूबेशन मैनेजर प्रशांत सिंह, सीनियर रेडियोलॉजिस्ट प्रो. राजुल रस्तोगी, टीएमयू आईआईसी कोऑर्डिनेटर प्रदीपकुमार वर्मा, सीसीएसआईटी से डॉ. प्रियांक सिंघल, सीओई से फैकल्टी निकिता जैन आदि भी शामिल रहे। उल्लेखनीय है कि एआई शिखर सम्मेलन में तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के 92 स्टूडेंट्स के साथ 17 प्री-इन्क्यूबीटी आदि की भी भागीदारी रही।
भारतीय तकनीक के क्रिएटर्स, प्रॉबल्म सॉल्वर्स, ग्लोबल इन्नोवेटर्स हैं
तीर्थंकर महावीर इनोवेशन फाउंडेशन टीएमआईएफ की निदेशक प्रो. मंजुला जैन ने पैनल डिस्कशन का शंखनाद करते हुए कहा, एआई स्वास्थ्य सेवा, जैव तकनीकी, कृषि, शिक्षा, वित्त यहां तक कि नेशनल सिक्योरिटी जैसे सभी क्षेत्र में बदलाव ला रही है। भारत बहुत ही अनोखा और आशाजनक होने के साथ-साथ बहुत ही शक्तिशाली दौर में है। हम केवल तकनीक के उपभोक्ता नहीं हैं, अब हम भारतीय तकनीक के क्रिएटर्स, प्रॉबल्म सॉल्वर्स, ग्लोबल इन्नोवेटर्स और कंट्रीव्यूटर्स भी हैं। अगर हमें वास्तव में इस एआई मिशन का नेतृत्व करना है तो हम सभी को एक स्ट्रांग और इंक्लूसिव एआई पाइपलाइन का निर्माण करना होगा, जो आइडियाज़ को इंप्लिमेंटेशन से कनेक्ट करती हो। इंडस्ट्री को रिसर्च से और टैलेंट को अपॉच्युनिटी से जोड़ती हो।
यूनिवर्सिटी के स्टार्टअप्स के लिए उद्योगों से जुड़ाव की वकालत
उन्होेंने स्टूडेंट्स से कहा कि आप भविष्य का निर्माण करोगे और केवल भारत को ही नहीं, बल्कि विश्व को भी समाधान प्रदान करोगे। इजराइल की सुश्री माया शरमन ने अपने देश में एआई की उपलब्धियों की चर्चा करते हुए कहा, तेजी से बदल रहे भारत का एजुकेशन सिस्टम दुनिया को आशान्वित कर रहा है, क्योंकि भारत एआई और पाठ्यक्रम को एकीकृत करने में सक्षम है। यूनिवर्सिटी के स्टार्टअप्स के लिए उद्योगों से जुड़ाव की वकालत करते हुए बोलीं, इजराइल में कम उम्र से ही स्टार्टअप्स हमारी सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में एक है।
कैंपस को अपने स्टेक होल्डर्स को अच्छी तरह से जानना चाहिए
टीएमयू की डीन एकेडमिक्स प्रो. जैन ने एक्सपर्ट्स से पूछा कि तेजी से बदलते एआई और नवाचार परिदृश्य में प्रासंगिक बने रहने के लिए कैंपस को कौन-सी चीज सीखनी और अर्जित करनी चाहिए? इस सवाल के जवाब में जेनोवा बायोफार्मास्यूटिकल्स की इंडिपेंडेंट डायरेक्टर डॉ. कविता सिंह ने बताया कि कैंपस को अपने स्टेक होल्डर्स को अच्छी तरह से जानना चाहिए। किसी भी स्टेक होल्डर्स को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। एफआईटीटी- आईआईटी, दिल्ली के एमडी डॉ. निखिल अग्रवाल ने चेताया कि हमें अलग-अलग नहीं मिलकर काम करने की दरकार है। पहले हमें फिजिकली जुड़ना पड़ेगा तभी हम डिजिटली जुड़ सकते हैं।
तुरंत एआई पर जाने की प्रवृति को बदलना होगा
इजराइल की माया शरमन ने कहा, मशीनों पर अत्यधिक निर्भरता हमें कई तरह से नुकसान पहुंचाती है। मानव की शक्ति उसकी रचनात्मकता में निहित है। इकोसिस्टम एवम् इन्नोवेशन स्ट्रेटेजी लीडर उत्कर्ष मिश्रा बोले, किसी भी समस्या के समाधान के लिए तुरंत एआई पर जाने की प्रवृति को बदलना होगा। पैनल चर्चा में वक्ताओं ने कहा कि एल्युमिनाई की भूमिका को नज़र अंदाज नहीं किया जा सकता है, क्योंकि पूर्व छात्रों का संस्थान से जुड़ाव महत्वपूर्ण होता है और तमाम प्रोजेक्ट्स के लिए सीएसआर से धन जुटाना सहज हो जाता है।













Add Comment